प्रमोद सेमवाल
गोपेश्वर। वर्ष 2013 की आपदा के बाद जब तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही में भारी कमी आई तो माणा के ग्रामीणों को अपने ऊन के कारोबार की चिंता सताने लगी थी, लेकिन इस बार माणा के ग्रामीण तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की चहल-पहल से बेहद खुश और उत्साहित हैं। मंद पड़ चुके उनके ऊन के कारोबार में भी थोड़ी तेजी आई है। ग्रामीणों के आपदा के बाद से बिक्री के लिए रखे ऊनी वस्त्रों की इस बार तीर्थयात्रियों और पर्यटकों ने जमकर खरीदारी की है।
माणा गांव में भोटिया जनजाति के ग्रामीण रहते हैं। यहां के ग्रामीण शीतकाल में छह माह के लिए जिले के निचले क्षेत्रों में रहते हैं और बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा शुरू होने पर अपने पैतृक गांव लौट आते हैं। शीतकाल में ग्रामीण ऊनी वस्त्र बनाते हैं। यहां के ऊनी कंबल, कालीन, दरी, टोपी, स्कार्प, स्वेटर और जैकेटों को तीर्थयात्री बेहद पसंद करते हैं। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से ग्रामीणों का कारोबार मानों ठप सा पड़ गया था। वर्ष 2014 से 2016 तक तीर्थयात्रा में भारी कमी के चलते माणा गांव में ऊन का कारोबार भी मंदा ही रहा। इस साल तीर्थयात्रा शुरुआत से ही बेहतर चली। अभी तक बदरीनाथ धाम में आठ लाख से अधिक तीर्थयात्री भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर चुके हैं। बदरीनाथ पहुंचने वाले अधिकांश तीर्थयात्री माणा गांव के सैर-सपाटे पर भी जाते हैं।
माणा के पूर्व प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि इस वर्ष गांव में तीर्थयात्रियों व सैलानियों की शुरुआत से ही चहल-पहल बनी रही। इससे ग्रामीणों का ऊन का कारोबार भी बेहतर चला। प्रधान पंकज बड़वाल का कहना है कि बाजार में रेडीमेट कपड़ों की धमक है। बावजूद इसके तीर्थयात्रियों ने ऊनी वस्त्रों की जमकर खरीदारी की।
बदरीनाथ धाम के रक्षक हैं माणा निवासी
बदरीनाथ से तीन किमी की दूरी पर बसे देश के अंतिम गांव माणा के ग्रामीणों को बदरीनाथ धाम के रक्षक के रूप में जाना जाता है। यहां माता मूर्ति का मंदिर, व्यास गुफा, गणेश गुफा, भीम पुल, शेष नेत्र और सरस्वती मंदिर स्थित है। यहीं से बसुधारा के लिए जाया जाता है। मान्यता है कि महाभारत के पश्चात पांडव भी इसी रास्ते से स्वर्ग के लिए गए थे। जब माणा गांव से आगे जाने का रास्ता नहीं मिला तो भीम ने सरस्वती नदी पर एक विशाल पत्थर को तोड़कर पुल का निर्माण किया था जो आज भी भीम पुल के नाम से जाना जाता है।
और यात्रा ने भी पकड़ी रफ्तार
साल 2013 की आपदा के बाद इस बार बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा ने भी रफ्तार पकड़ी है। जहां बीते वर्षों तक अक्तूबर में तीर्थयात्रियों की संख्या दो से तीन सौ तक पहुंच जाती थी, इस साल बदरीनाथ में प्रतिदिन पंद्रह सौ से अधिक तीर्थयात्री भगवान बदरीनाथ के दर्शन को पहुंच रहे हैं। अब तक बदरीनाथ में 802317 तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम में मत्था टेकने पहुंचे हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट 19 नवंबर को बंद हो जाएंगे। तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को देख श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति भी उत्साहित है।
कब कितने यात्री पहुंचे
वर्ष तीर्थयात्री
2012 10 लाख 42 हजार 215
2013 4 लाख 91 हजार 999
2014 1 लाख 80 हजार
2015 3 लाख 59 हजार 146
2016 6 लाख 20 हजार
2017 8 लाख 2 हजार 317 (8 अक्तूबर तक)