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बच्चों का भविष्य संवार रहा दिव्य प्रेम सेवा मिशन

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राजेश शर्मा
हरिद्वार।
हाल ही में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर चर्चा में आए दिव्य प्रेम सेवा मिशन में सोमवार को बड़ा ही भावविभोर कर देने वाला माहौल था। यहां वंदेमातरम कुंज स्थित दिव्य भारत शिक्षा मंदिर स्कूल और चंडी स्थित माधव राव दवले शिक्षा मंदिर में पढ़ने वाले कुष्ठ रोगियों तथा अन्य जरूरतमंद परिजनों के बच्चों का अपने परिजनों से मिलने का वार्षिक कार्यक्रम था। आर्थिक तंगी के चलते बच्चों को पढ़ा पाने में विफल अभिभावकों ने जब यहां अपने बच्चों को प्रगति के पथ पर बढ़ते देखा तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू झलक उठे। उन्होंने संस्था के संस्थापक आशीष गौतम और संयोजक संजय चतुर्वेदी समेत उनकी पूरी टीम का आभार जताया।
अभिभावक जितेंद्र, रामेंद्र, विजेंद्र का कहना था कि अपने बच्चों का जीवन बनाने के लिए वे हमेशा संस्था के प्रति कतृज्ञ रहेंगे। शाम तक चले मेल मिलाप के इस कार्यक्रम में जब विदाई की बेला आई और अभिभावकों की आंखें नम हो गई। दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संयोजक संजय चतुर्वेदी ने बताया कि हर साल दो अक्तूबर को छात्रावास में रहने वाले बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया जाता है। इस दौरान घर वाले अपने बच्चों को कपड़े, खाने का सामान और अन्य उपहार भी देते हैं।
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अभिभावक बोले
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संस्था के स्कूल में आशीष कक्षा दो और नवीन कक्षा एक में पढ़ रहा है। पिता नागेश दिव्यांग हैं और मा पांडी अंबा बच्चों से मिलने नहीं आ सके। दादा सोलेराज और दादी पंजा वर्मा बच्चों से मिलने आए हैं। बच्चों को गले लगाकर दादी ने प्यार दिया। उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चे के लिए वह सब कराना चाहती है, जो उसके परिवार में कोई नहीं कर पाया।

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कक्षा छह में पढ़ने वाली छात्रा पूजा के पिता राजेंद्र कुष्ठरोगी है। मूल रूप से लुघियाना पंजाब के रहने वाले राजेंद्र की बिटिया चार वर्षों से दिव्य प्रेम सेवा कुंज के छात्रावास में रह रही है। पूजा की मां सविता रुड़की में संस्था द्वारा संचालित आश्रम में रह रही है। पिता राजेंद्र बेटी को पढ़ा कर डाक्टर बनाना चाहते है, ताकि बेटी लोगों का इलाज कर सके।
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रोहन और अमन कक्षा दो और एक में पढ़ते है। दो साल से दोनों भाई यहां हरिद्वार में रह रहे हैं। पिता संताष और माता मंगला, दादा रामप्रसाद बच्चों ने मिलने पहुंचे और बच्चों को अपने घर सहारनुपर से खाना बनाकर लेकर आए। पिता ने अपने हाथों से बच्चों को खाना लिया। पिता अपने एक बेटे को इंजीनियर और दूसरे बेटे को इस काबिल बनाना चाहते है कि बेटा आगे चलकर इस तरह की संस्था चला सका।


मॉरीशस में प्रतिभा का लोहा मनावा रहा हिमांशु
हरिद्वार। दिव्य प्रेम सेवा मिशन में पढ़ लिखकर बडा हुआ अनाथ बच्चा हिमांशु अब मॉरीशस में डाक्टरी की पढ़ाई कर रहा है। माता- पिता न होने से संस्था ने बेटे की तरह हिमांशु को प्यार दिया।
हिमांशु अपनी दुनिया में अकेला ही है। दस वर्ष पहले उसकी मां का ऋषिकेश में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पिता की भी पहले ही मौत हो चुकी थी। ऋषिकेश से किसी व्यक्ति ने दिव्य प्रेम सेवा मिशन से संपर्क कर हिमांशु की पूरी दास्तां बताई। संस्था ने हिमांशु और उसके छोटे भाई को अपने स्कूल में दाखिला दे दिया। पढ़ाई में होशियार हिमांशु हाईस्कूल और इंटर में अच्छे नंबरों से पास हुआ। उसने जब एमबीबीएस करने की इच्छा बताई तो संस्था के पदाधिकारियों ने इसके लिए हामी भर दी। एंट्रेस एग्जाम देने के बाद हिमांशु का चयन मॉरीशस की टॉप मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए हो गया। अब हिमांशु एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। बीते साल यूनिवर्सिर्टी में भी हिमांशु ने अच्छे अंक लाकर हरिद्वार का नाम रोशन किया है।

चार बच्चे राज्य की टीम में शामिल
हरिद्वार। दिव्य प्रेम सेवा मिशन संस्था की ओर से संचालित वंदेमातरम कुंज के चार बच्चे उत्तराखंड की अंडर 14 कबड्डी टीम में हैं। पढ़ाई के साथ- साथ खेल में भी स्कूल के बच्चे नाम रोशन कर रहे है। उधर कक्षा आठ के पढ़ने वाले मनीष पासवान नेशनल खेल चुके हैं। मनीष पासवान मध्यप्रदेश में हुए नेशनल गेम्स में कबड्डी में खेले थे। अब 9 अक्तूबर को होने वाले चयन के लिए उन्होंने आवदेन किया है।


बच्चों को बताया गांधी, शास्त्री का व्यक्तित्व
हरिद्वार। गांधी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में दिव्य प्रेम सेवा मिशन परिसर में बच्चों को महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व के बारे में बताकर उनके आदर्शों का अनुसरण करने का आग्रह किया गया। इस अवसर पर संजू, हेमंत, कविता, शीतल, आयुष, मंगल, यामिनी, कविता, रंजीत, राकेश, अमरजीत, रवि, सरिल, आयुष, पवन, पूजा ने योग आसन, पर्यावरण व स्वच्छता पर नाटक सहित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
मुख्य अतिथि मुस्कान फाउंडेशन की अध्यक्ष नेहा मलिक ने कहा कि दिव्य प्रेम सेवा मिशन के कार्यकर्ता ऐसे बच्चों को रास्ता बता रहे हैं, जिन्हें कोई छूना भी पसंद नहीं करता। यह सच्ची मानव सेवा है। दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संयोजक संजय चतुर्वेदी ने कहा कि महात्मा गांधी ने अपना सारा जीवन दूसरों की सेवा के लिए अर्पित कर दिया। हमें उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। कहा कि अपने बच्चे को छात्रावास में छोड़ना मां- बाप के लिए बड़ा ही कठिन काम होता है, लेकिन ये बच्चे एक दिन बड़ा नाम कमाएंगे। छात्रावास अधीक्षक उमाशंकर सिंह नेे अविभावकों को बच्चों की प्रगति के बारे में जानकारी दी।
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इस अवसर पर अमित, सोम, मनीष, रोहित, सतेंद्र, विशाल, शिवम, सूरज, भगत, उमेश, धर्मेंद्र, श्रीकांत, विकास, अनुज खेल प्रतियोगिताओं में क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय रहे। भाषण में संदीप पहले, आकाश दूसरे, अनुज तीसरे स्थान पर रहे। इस अवसर पर भाजपा नेता अनिरुद्ध भाटी, हितेश शर्मा, विनीत जौली, नीरज मलिक, नरेश सेमवाल, ज्योत्सना मल्होत्रा, सतीश, विवेक मोंगा, शुभम शर्मा, पूनम, मिशन के सह संयोजक डा. जितेंद्र सिंह, प्रशांत खरे, मीडिया प्रभारी बालकृष्ण शास्त्री, विश्वास शर्मा, अर्पित मिश्रा, राहुल सिंह, विजेंद्र पांडेय, आनंद रिछारिया, जितेंद्र सोमवंशी, संतोष सिंह भी उपस्थित थे। संचालन प्रधानाचार्य राजेंद्र राणाकोटी ने किया।
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