कर्णप्रयाग। श्री राजराजेश्वरी चंडिका रामलीला कमेटी सिमली की ओर से आयोजित रामलीला के छठवें दिन सीता हरण का मंचन किया गया। रामलीला मंचन में कलाकारों के अभिनयों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान रामलीला कमेटी ने जीआईसी सिमली में 25 नाली भूमि दान में देने वाली मज्याड़ी गांव की एकादशी देवी को सम्मानित किया।
रामलीला मंचन में लंकाधिपति रावण की बहिन सूर्पणखा पंचवटी में आकर राम और लक्ष्मण से उसको वरण करने की बात कहती है। राम के मना करने पर भी जब सूपर्णखा नहीं मानती तो लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं। सूर्पणखा रोती हुई रावण के पास जाती है और अपने साथ हुई घटना की जानकारी देती है। यह सुनने के बाद रावण मामा मारीच को सोने का मृग बनने की सलाह देते हुए पंचवटी जाने के लिए कहता है। सीता स्वर्ण मृग देख राम से मृग लाने को कहती हैं। राम स्वर्ण मृग के पीछे बहुत दूर तक निकल जाते हैं और काफी देत तक राम के न आने पर लक्ष्मण भी वन में जाते हैं। सीता को अकेली देखकर रावण साधु के वेश में आकर छल से उनका हरण कर पुष्पक विमान से लंका ले जाता है। राम और लक्ष्मण वापस आते हैं तो सीता को पंचवटी में न देखकर व्यथित हो जाते हैं। वह विलाप करते हुए पक्षियों, मृग, भोंरों आदि से सीता के बारे में पूछते हैं। इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष गौचर मुकेश नेगी, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी, दलवीर सेनवाल, सुनील पंवार, हरीश नेगी, जयदीप गैरोला, हरीश लडोला और प्रदीप गैरोला आदि मौजूद थे।