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स्वदेशी के दम पर इस मुकाम तक पहुंची विश्व की पहली कंपनी पतंजलि

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कौशल सिखौला
हरिद्वार।
स्वामी रामदेव की पतंजलि योगपीठ को विश्व में ऐसी पहली कंपनी होने का गौरव प्राप्त हो गया है, जो केवल स्वदेशी के बल पर इतने ऊंचे स्थान पर पहुंची हो। विश्व की प्रसिद्ध पत्रिका ने तेजी से बढ़ती संस्थाओं में गत वर्ष पतंजलि को 25 वां स्थान दिया था। अब देश के उद्यमों में पतंजलि का स्थान आठवां आंका गया है। हाल ही में घोषित टॉप टेन उद्योगपतियों में बालकृष्ण का नाम अडानी के बाद आठवें स्थान पर घोषित किया गया है।
इस उपलब्धि पर पतंजलि योगपीठ में दो दिनों से हर्ष का माहौल हैं। उत्साह का आलम यह है कि स्वयं रामदेव ने आचार्य बालकृष्ण के कक्ष में जाकर उन्हें न केवल बधाई दी अपितु अपने बालसखा को गले भी लगाया। भारत के आर्थिक सर्वें में चुने गए टॉप टेन उद्योगपतियों में पतंजलि की उपलब्धि गत वर्ष के मुकाबले 173 प्रतिशत अधिक रही है। यहां यह बात विशेष उल्लेखनीय है कि देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी की उद्योग प्रगति केवल 58 प्रतिशत रही। नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद यह उपलब्धि हासिल करना महत्वपूर्ण है। भारत के अर्थ विश्लेषण के अनुसार पतंजलि का कारोबार 70 हजार करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि उनसे ऊपर गौतम अडानी हैं, जिनकी कुल संपत्ति बालकृष्ण से 600 करोड़ अधिक है। बालकृष्ण केवल 12 वर्षों में आठवें स्थान पर पहुंचे हैं। इसके विपरीत पुराने जमाने से कारोबार कर रहे उदय कोटक नौवें और सुनीत मित्तल दसवें स्थान पर आंके गए हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि दूसरे स्थान पर रहे संघवी ग्रुप की उन्नति -27 प्रतिशत गिर गई। सायरस पूनावाला छठे स्थान पर हैं किंतु उनकी ग्रोथ -9 प्रतिशत गिर गई है।
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इस उपलब्धि पर देश विदेश से स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को बधाइयों के तांते लगे हुए हैं। दुनिया के किसी भी मुल्क में किसी भी उद्योग ने इतने कम समय में इतना ऊंचा मुकाम केवल स्वदेशी के दम पर हासिल नहीं किया। देश की बेहद पुरानी आयुर्वेदिक इकाइयां पतंजलि से बहुत पीछे रह गई हैं। नानलिस्टिंग कंपनी होते हुए भी पतंजलि की यह ऊंचाई बड़े-बड़े अर्थ विश्लेषकों को आश्चर्यचकित कर रही है। ऊंची उड़ान भरने के बाद पतंजलि का ख्वाब है कि विशुद्ध सेवा प्रकल्पों के दम पर आगे बढ़ते हुए यह संस्था अगले 20 वर्षों में देश की नंबर वन बन जाए। स्वामी रामदेव के अनुसार यह मुकाम पाने के लिए और कड़ा श्रम किया जाएगा। स्वदेशी उद्योगों को देशभर में बढ़ावा देने और विदेशी उत्पादनों का देश से समापन करने के लिए काम शुरू हो चुका है।
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निष्ठा, राष्ट्रभक्ति और लगन हमारा उद्देश्य
देश को आगे ले जाना हमारा उद्देश्य है। गौरव का विषय है कि पतंजलि संस्था सेवा के प्रकल्पों पर चलते हुए इस मुकाम तक पहुंची है। वर्ष 2005 से शुरू हुई यह यात्रा अगले 20 वर्षों में कहां तक जाएगी, उसका स्वप्न हमारे पास है। वह दिन दूर नहीं जब विदेशी वस्तुओं के स्थान पर देशवासी स्वदेशी को पंसद करेंगे, ऐसा होने भी लगा है। अब देशवासियों ही नहीं अपितु विदेशियों का को रोसा भी आयुर्वेद के प्रति जगा है। समझ लें कि एक बड़ी क्रांति हो चुकी है। पतंजलि को 12 वर्षों में आठवें स्थान पर आंकना भगवा संस्कृति से निकले हम लोगों के लिए बड़े मान का विषय है।
- आचार्य बालकृष्ण, महामंत्री पतंजलि योगपीठ
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