देवप्रयाग। स्वामी रामतीर्थ पर शोध और लेखन कर चुके डा. विद्यानंद ब्रह्म्मचारी का कहना है कि स्वामी का उत्तराखंड से गहरा लगाव था। इसे देखते हुए उनसे जुड़े स्थानों को संरक्षित किए जाने की जरूरत है। कहा कि बदरीनाथ धाम में उनका स्मारक बनना चाहिए। साथ ही केंद्रीय विवि श्रीनगर को गणित विषय में रामतीर्थ के नाम पर मेधावी छात्र छात्राओं के लिए पुरस्कार शुरू करना चाहिए।
वर्ष 1978 में रांची विवि से स्वामी रामतीर्थ जीवन गाथा पर पीएचडी कर चुके डा. विद्यानंद ब्रह्मचारी के रामतीर्थ पर लगभग 42 पत्र-पत्रिकाओं में 110 लेख प्रकाशित हो चुके हैं। मूल रुप से बिहार के खगड़िया के रहने वाले विद्यानंद ने बदरीनाथ से लौटने के दौरान देवप्रयाग में पत्रकारों से वार्ता करते हुए रामतीर्थ के योगदान पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि स्वामी रामतीर्थ ने वर्ष 1901 में बदरीनाथ व फूलों की घाटी की यात्रा की थी। जहां उन्होंने कई काव्य रचनाएं और पत्र लिखे, लेकिन बदरीनाथ धाम में रामतीर्थ का कोई स्मृति स्थल नहीं है। व्यावहारिक वेदांत की शिक्षा देने वाले स्वामी रामतीर्थ का बदरीनाथ धाम में स्मारक बनना चाहिए।