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जीजीआईसी की छत का प्लास्टर गिरा, बाल-बाल बची छात्राएं

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श्रीनगर। तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते जीजीआईसी में एक कक्षा कक्ष की छत का प्लास्टर भरभरा कर गिर पड़ा। गनीमत रही कि इस दौरान कक्षा में बैठी छात्राओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
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1980 में बना जीजीआईसी श्रीनगर का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इससे विद्यालय प्रबंधन ने कई कक्षा कक्षों को बंद कर दिया है। जिन कक्षों में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। वह भी जर्जर स्थिति में हैं। शनिवार को बारिश के दौरान एक कक्षा कक्ष की छत का प्लास्टर भरभरा गिर पड़ा। उस दौरान छात्राएं कक्षा में ही मौजूद थी। गनीमत रही कि प्लास्टर का मलबा उस स्थान पर गिरा जहां छात्राएं नहीं बैठी थी। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया। प्रधानाचार्य विमला कंडारी ने बताया कि बारिश के दौरान सभी कक्षों में पानी टपकता है। दीवारें पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। हर समय हादसे का भय बना रहता है। कंडारी ने बताया कि विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति के बारे में विभागीय अधिकारियों, तहसील प्रशासन सहित जनप्रतिनिधियों को भी कई बार लिखित व मौखिक रूप से अवगत करा दिया गया है, लेकिन कोई भी छात्राओं की सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। शनिवार को भी विद्यालय प्रबंधन ने प्लास्टर गिरने की घटना पत्र के माध्यम से एसडीएम को अवगत कराया है।
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- विद्यालय भवन की मरम्मत के लिए स्टीमेट तैयार कर दो वर्ष पूर्व शासन को भेजा गया है, लेकिन धनराशि स्वीकृत न होने के कारण भवन की मरम्मत नहीं हो पा रही है।
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हरेराम यादव, जिला शिक्षा अधिकारी, माध्यमिक।
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