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बाढ़ सुरक्षा तटबंधों के निर्माण में करोड़ों का घोटाला

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रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
केंद्र पोषित बाढ़ सुरक्षा योजना के तहत कटाव से गंगा तटीय गांवों तथा खेती को बचाने के लिए तटबंधों के निर्माण तथा काश्तकारों को भूमि अधिग्रहण व फसल का मुआवजा देने में भी गड़बड़ी की शिकायतें हैं। सैकड़ों की संख्या में ऐसे काश्तकारों के नाम सामने आए हैं जिन्हें मुआवजा नहीं दिया गया है और योजना को पूर्ण (क्लोज) करना मान लिया गया है। अधिकारियों ने शासकीय अधिवक्ता के बजाय देहरादून से प्राइवेट अधिवक्ता हायर कर 13 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।
अधिकारियों ने तटबंध निर्माण के लिए किसानों की अधिग्रहीत भूमि की रजिस्ट्रियां कराने व फसल प्रतिकर का भुगतान के लिए अधिवक्ता को प्रति रजिस्ट्री के हिसाब से 8500 व 8800 रुपये का अग्रिम भुगतान मार्च 2016 में किया और रजिस्ट्रियां अप्रैल-मई में कराई गई हैं। पिछली हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में हुए इस भ्रष्टाचार की किसानों की शिकायत पर शासन स्तर पर सुस्तगति जांच भी चल रही है। किसानों ने शासन को इस घोटाले के संबंध में शपथ-पत्र भी दे रखे हैं। जमीन भी गई और मुआवजा भी नहीं मिलने से परेशान काश्तकार उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारियों के पास चक्कर लगाते थकने के बाद अब हाईकोर्ट की शरण में जा रहे हैं। सूचना का अधिकार के अंतर्गत प्राप्त सूचनाओं से पता चलता है कि कई किसानों को उनके भुगतान के बैंक ड्राफ्ट ही नहीं दिए गए हैं, जो अभी खंड कार्यालय के फाइलों में धूल फांक रहे हैं।
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23 किसानों के बैंक ड्राफ्ट प्राप्ति के हस्ताक्षर नहीं
बालावाली से खानपुर के तटबंध निर्माण के लिए ग्राम रघुनाथपुर के 78 काश्तकारों की भूमि की रजिस्ट्री कराने के लिए मुआवजे का 99 लाख 20 हजार 160 रुपये के बैंक ड्राफ्ट बनाए गए। विभाग की सूची में 23 काश्तकारों के बैंक ड्राफ्ट प्राप्ति के किसानों के हस्ताक्षर नहीं हैं। वेद प्रकाश आदि किसान इस बाबत सबको ज्ञापन दे चुके हैं। जबकि अधिवक्ता को 78 रजिस्ट्रियां कराने की फीस 3 लाख 8 हजार रुपये का भुगतान फरवरी 2016 में ही कर दिया गया था।
ग्राम मंसूरपुर के 44 काश्तकारों के बैंक ड्राफ्ट मार्च में बनाने दिखाएं गए हैं, परंतु उपलब्ध काश्तकारों की सूची में ड्राफ्ट प्राप्ति का साक्ष्य नहीं होने से साफ है कि किसानों को बैंक ड्राफ्ट दिए ही नहीं गए हैं।
सिंचाई विभाग के नाम दाखिल खारिज नहीं
ग्राम कलसिया, ग्राम कुंदनपुर आदि के काश्तकारों के साथ भी अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा तथा फसल प्रतिकर भुगतान करने में भी गड़बड़ियां हुई हैं। जिन किसानों को मुआवजा देकर रजिस्ट्रियां कराई गई हैं, उनका अभी सिंचाई विभाग के नाम दाखिल खारिज नहीं किया गया है। इसका एक कारण यह बताया जा रहा है कि अनेक किसानों पर बैंकों का ऋण भी है जब तक बैंक ऋण का भुगतान नहीं कर दिया जाता है तब तक जमीन विभाग के नाम दाखिल खारिज नहीं हो सकती है।

भूमि भी गई मुआवजा भी नहीं मिला
ग्राम हस्तमौली, मदारपुर, आलमपुर, यायापुर, अबदीपुर आदि कई गांवों के किसानों की जमीन पर सिंचाई विभाग ने तटबंध का निर्माण भी करा दिया है और किसानों को न तो फसल प्रतिकर का भुगतान किया गया और न मुआवजा दिया गया है। इन गांवों के काश्तकारों ने जून में काम भी रुकवा दिया, परंतु भुगतान आज-कल करने का झांसा देकर अधिकारियों ने अपना काम कर स्कीम को क्लोज कर दिया है। इस बात को किसानों से भी छिपाया गया है। क्षेत्र के किसान अब मुआवजा की मांग को लेकर हाईकोर्ट में दस्तक दे रहे हैं।
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योजना में केंद्र सरकार ने पैसा देना बंद कर दिया था इसलिए स्कीम बंद हुई है। जिससे किसानों का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। स्कीम चालू करने के लिए रिवाईज इस्टीमेट बनाया जाएगा। जो काम हो चुका है उसकी जो देनदारी है उसकी मांग केंद्र सरकार को भेजी जा रही है। प्रकरण को मुख्यमंत्री व सिंचाई मंत्री के संज्ञान में भी लाया जा चुका है। जहां तक खंडीय स्तर पर भ्रष्टाचार करने संबंधी किसानों की शिकायतों की जांच कराई जा रही है।
- दिनेश चंद्रा, मुख्य अभियंता, उत्तराखंड सिंचाई विभाग।
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