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समूचा संत समाज आहत, अखाड़े में सन्नाटा

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कोठारी मंहत के लापता होने की सूचना से संत समाज समेत पूरा शहर अनिष्ट की आशंका से विचलित है। महंत के बारे में जानकारी लेने के लिए कनखल स्थित श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन में लोगों का जमावड़ा लगा रहा।
महंत मोहनदास शहर के सामाजिक सरोकारों से भी जुडे हैं। संत जगत में उन्हें काफी सम्मान प्राप्त है। सुबह जैसे ही उनके लापता होने की चर्चा हुई तो हरिद्वार में ही मौजूद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी, दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी, रविंद्र गिरी, महंत ऋषिश्वरानंद, सतपाल ब्रह्मचारी, महंत भगवानदास, महंत बलदेव सिंह, जसविंद्र सिंह, गोपाल सिंह, भगतराम, स्वामी कपिल मुनि, नरेंद्र दास, निरंजनदास, दर्शन सिंह, बाबा हठयोगी, स्वामी रामकृष्ण महाराज, कृष्णा सिंह के अलावा पूर्व विधयक अंबरीश कुमार, मुकेश कौशिक, अशोक शर्मा समेत तमाम राजनीतिक लोगों भी उनकी खोज खबर लेने को अखाड़े पहुंचे।
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अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष समेत तमाम संतों ने एक कमरे में संतों के साथ बैठक की। सभी संभावनाओं को लेकर विचार किया गया। अखाड़े का या महंत मोहनदास को किसी से कोई विवाद होने की बात सामने नहीं आई है। संतों से मिलने आए एसएसपी कृष्णकुमार वीके के पूछने पर सबका कहना था कि बेहद मृदुभाषी संत मोहनदास का किसी से कोई विवाद नहीं था।
एसएसपी ने आश्वस्त किया कि पुलिस हरसंभव प्रयास करेगी। बाद में एसएसपी ने पत्रकारों से कहा कि ज्यादा संभवना इस बात की है कि ाकहीं महंत मोहनदास चलती ट्रेन में गिर न गए हों लेकिन सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। जिन राज्यों से होकर ट्रेन गुजरी सभी जगह पुलिस से संपर्क किया जा रहा है। एसओजी की टीमें मोबाइल फोन को ट्रेस करने में लगी हैं।

मेरठ में दी गई चाय
हरिद्वार। मंहत मोहनदास द्वितीय एसी क्लास ट्रेन से जा रहे थे। हरिद्वार से रुड़की होते हुए ट्रेन जब मेरठ पहुंची तो उनको चाय दी गई। ट्रेन में ड्यूटी करने वाले टीटी ने पुलिस को बताया कि मेरठ में उनको चाय दी गई थी। उसके बाद उनको नहीं देखा गया था।
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वर्ष 2012 में कोठारी बने थे मोहनदास
वर्ष 2012 के अक्तूबर में श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के कोठारी महंत राजेंद्रदास ब्रह्मलीन हो गए थे। उनके बाद कोठारी महंत की जिम्मेदारी मोहनदास को दी गई थी। वर्ष 2004 में अखाड़े के कारोबारी महंत बने मोहनदास वर्ष 2012 नवंबर में कोठारी महंत बनाए गए थे। वर्ष 2012 तक मोहनदास फेरुपुर स्थित अखाड़े के आश्रम में रह रहे थे। वर्ष 2012 में कनखल स्थित अखाड़े में कोठारी महंत का पद संभालने के बाद यहां पहुंचे थे।
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