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भागवत ने हरिद्वार पहुंचकर संतों के साथ मनाया जन्म दिवस

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने जन्मदिन पर हरिद्वार में सूरत गिरी बंगला में गंगातट पर पूजा अर्चना की। उन्होंने प्रमुख संतों के साथ गंगा में दुग्धाभिषेक करने के साथ ही कारगिल युद्ध में शहीद हुए परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विजयंत थापर और कैप्टन मनोज कुमार पांडेय के माता-पिता को गंगाजलि देकर सम्मानित किया। शहीदों के परिजनों ने सम्मान को शहीदों की शहादत और उनका मान सम्मान बताया।
सोमवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अपने जन्मदिन पर हरिद्वार पहुंचे। यहां कनखल स्थित सूरत गिरी बंगला आश्रम में संतों के साथ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक आदि ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने गंगातट पर पूजा- अर्चना और रुद्राभिषेक किया। उन्होंने इस दौरान संतों का आशीर्वाद लिया। गंगातट पर ही उन्होंने कारगिल युद्ध में शहीद हुए कैप्टन विजयंत थापर के पिता सेवानिवृत्त कर्नल वीरेंद्र नाथ थापर एवं माता तृप्ता थापर को और शहीद कैप्टन मनोज कुमार पांडेय के पिता गोपीचंद पांडेय एवं माता मोहिनी पांडेय को गंगाजलि देकर सम्मानित किया। इस दौरान जगद्गुरू शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि संघ प्रमुख के चिंतन से देश वृद्धि कर रहा है।
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इस मौके पर संघ प्रमुख ने महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद, स्वामी परमात्मानंद, स्वामी सदानंद महाराज, स्वामी विश्वस्पानंद, स्वामी प्रह्लाद ब्रह्मचारी का टीका किया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक संजय गुप्ता, राजेश शुक्ला, आलोक, युद्धवीर, प्रदेश मीडिया सह प्रभारी ओमप्रकाश जमदग्नि, जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह चौहान, जिला उपाध्यक्ष नरेश शर्मा एवं विकास तिवारी, भाजयुमो जिलाध्यक्ष हरजीत सिंह, मृदुल कौशिक, अनिरुद्घ भाटी, विदित शर्मा, राजीव भट्ट समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

शहीदों के सम्मान से भावुक हुए परिजन
हरिद्वार। कारगिल युद्ध के दौरान 529 सैनिकों ने अपनी शहादत दी थी। इनमें कैप्टन विजयंत थापर और कैप्टन मनोज कुमार पांडेय भी थे। शहीदों के परिजन उनके गौरव को स्मरण करते हुए भावुक हो उठे। हरिद्वार में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हाथों से सम्मान लेने के बाद दोनों शहीदों के अभिभावकों ने वीर गाथा सुनाई।

शहीद कैप्टन विजयंत थापर
सेना में रहकर 37 वर्ष तक सेवा कर चुके शहीद के पिता कर्नल वीएन थापर और माता तृप्ता थापर ने बताया कि विजयंत थापर का जन्म 26 दिसंबर1976 को पंजाब के शहर नया नंगल में हुआ। वे इंडियन मिलिट्री एकेडमी में 1997 में भर्ती हुए थे और 2 राजपूताना राइफल्स के माध्यम से देश सेवा शुरू की। बताया कि जून 1999 को 22 वर्ष में साहस से लबरेज विजयंत ने कारगिल के द्रास क्षेत्र में युद्ध करते हुए जान की बाजी लगा दी थी।कै प्टन विजयंत थापर को मरणोपरांत 26 जनवरी 2000 को सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। विजयंत थापर के परमवीर चक्र में उल्लेख किया गया है कि साहसी, शांत और अनुकरणीय वीरता प्रदर्शित करते हुए कैप्टन विजयंत थापर ने दुश्मनों से लड़ते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। कारगिल पर दुश्मनों के हमले के बाद, शायद अपनी आने वाली मौत को भांपते हुए कैप्टन विजयंत ने अपने परिवारवालों के नाम एक चिट्ठी लिखी थी। जिसमें उन्होंने लिखा कि, जब तक ये चिट्ठी आप लोगों तक पहुंचेगी, शायद मैं न रहूं। मेरे मरणोपरांत अनाथालय में कुछ रुपये दान करें, और रुखसाना को 50 रुपये प्रति माह भेजते रहें। रुखसाना पांच वर्षीय बच्ची थी, जो कैप्टन के साथ खेला करती थी और उसे विजयंत से काफी स्नेह था।
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अमर शहीद मनोज पांडेय
शहीद कैप्टन मनोज कुमार पांडेय के पिता गोपीचंद पांडेय एवं माता मोहिनी पांडेय ने बताया कि परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडेय का जन्म 25 जून 1975 में सीतापुर उत्तर प्रदेश में हुआ था। मनोज आईआईटी और एनडीए दोनों में अच्छे नंबरों से पास हुए, लेकिन मनोज ने एनडीए में दाखिला लिया। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वह बतौर कमीशंड ऑफिसर ग्यारहवां गोरखा राइफल्स की पहली बटालियन में पहुंच गए। उनकी तैनाती कश्मीर घाटी में हुई। कारगिल युद्ध के दौरान मनोज कुमार पांडेय ने निर्णायक युद्ध के लिए 2-3 जुलाई 1999 को कूच किया,जब उनकी कंपनी को खालूबार फतह करने का जिम्मा सौंपा गया। इन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन के एक के बाद एक बंकर तबाह करने के बाद चौथे बंकर की ओर एक हैंड ग्रेनेड फेंका। तभी दुश्मन की गन से छूटी हुई होली उनके माथे पर लगी। उनके हाथ से फेंके हुए ग्रेनेड का निशाना अचूक रहा। ग्रेनेड ठीक चौथे बंकर पर लगा और उसे तबाह कर दिया। मगर मनोज कुमार पांडे इसमें शहीद हो गए। मनोज कुमार पांडेय की अगुवाई में की गई इस कार्रवाई में दुश्मन के 11 जवान मारे गए। साथ ही खालूबार भारत की सेना के अधिकार में आ गया था। कश्मीर के बटालिक सेक्टर में 03 जुलाई 1999 को मातृभूमि के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। शहीद कैप्टन मनोज पांडेय की पर्सनल डायरी में लिखे शब्द‘मेरा बलिदान सार्थक होने से पहले अगर मौत दस्तक देगी तो संकल्प लेता हूं कि मैं मौत का भी कत्ल कर दूंगा’ पढ़कर ही शरीर के रोएं हरकत में आ जाते हैं।
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