कौशल सिखौला
हरिद्वार।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने हाल ही में देेश के 14 संतों को फर्जी संत घोषित किया है। यह विडंबना ही है कि जिन दो संतों को अब फर्जी बताया गया है उनको महामंडलेश्वर का पद स्वयं अध्यक्ष और महामंत्री ने ही प्रदान किया था। अब दोनों को फर्जी बताकर गैर संत करार दे दिया गया है। हकीकत यह है कि देश भर में फैले हजारों आश्रमों में ही नहीं अपितु 13 अखाड़ों ने भी कई फर्जी संत बाकायदा भगवा वेश में रह रहे हैं।
जिन राधे मां को अब फर्जी करार दिया गया है उन्हें हरिद्वार के जूना अखाड़ा में ही स्वयं वर्तमान राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने महामंडलेश्वर बनाया था। यही नहीं जूना पीठाधीश्वर और आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने उनका अभिषेक किया था। हालांकि बाद में संत जगत के भारी विरोध के चलते राधे मां से दी गई उपाधि छीन ली गई। इसी प्रकार वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने अपने निरंजनी अखाड़े में सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर बनाकर सच्चिदानंद गिरि नाम दे दिया था। इन दोनों संतों के अभिषेक में न केवल सभी 13 अखाड़ों को अपितु हरिद्वार के तमाम आश्रम के संतों ने भी भाग लिया था। संत जगत के प्रचलित नियमों को तोड़ते हुए राधे मां को रात के 12 बजे अंधेरे में महामंडलेश्वर बनाया गया। अध्यक्ष द्वारा महामंडलेश्वर बनाए गए सच्चिदानंद गिरि का भी भारी विरोध हुआ और उन्हें भी एक बार फिर से उपाधि छीनकर सचिन दत्ता बना दिया गया। अब गौरतलब यह भी है कि जब दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दो संतों को महामंडलेश्वर बनाया था तो अब उन दोनों के पास उपाधि न होते हुए भी उन्हें फर्जी क्यों घोषित किया गया। दक्षिण भारत के बहुचर्चित संत नित्यानंद स्वामी को प्रयाग कुंभ में महानिर्वाणी अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाया था। उन पर अनेक मुकदमें चल रहे हैं और वे बहुत विवादित भी हैं। इसके बावजूद जारी की गई सूची में उनका नाम नहीं है।
चर्चित संतों की सूची में लंबे समय से स्वयंभू तंत्र सम्राट चंद्रा स्वामी का नाम चलता आया। उनके जीवन काल में कोई भी अखाड़ा उनके विरुद्घ कार्रवाई करने का साहस नहीं जुटा पाया। दिल्ली के प्रोपर्टी डीलर स्वयंभू गोल्डन बाबा जूना अखाड़े के बाकायदा महंत बनाए गए थे। बाद में उनका प्रमोशन कर उन्हें न केवल श्रीमहंत बना दिया गया, अपितु जूना अखाड़े के सर्वोच्च रमता पंचों में भी शामिल कर लिया गया। विश्व चर्चित पायलट बाबा और चंद्रा स्वामी के बेहद नजदीकि रहे अर्जुन पुरी को अखाड़ों द्वारा ही महामंडलेश्वर पद की उपाधि प्रदान की गई थी। कुछ वर्ष पूर्व इन दोनों संतों ने जब प्रयाग कुंभ में अखाड़ा परिषद को नंबर दो बनाते हुए महामंडलेश्वरों की अखिल भारतीय महामंडलेश्वर अखाड़ा परिषद गठित डाली तब अखाड़ा परिषद ने दोनों को निष्कासित कर दिया। महामंडलेश्वर परिषद में शामिल हुए और हरिद्वार से लोकसभा चुनाव लड़ चुके स्वामी यतींद्रानंद को भी अखाड़े से निकाल दिया गया। बाद में पायलट बाबा और अर्जुन पुरी के खेद प्रकाशन पर दोनों का निष्कासन वापस हुआ। अखाड़ा और आश्रमों में आज भी अनेक संत छिपे हुए है, जिनका वास्तव में संत जगत से कोई लेना देना नहीं है। किसी ने भी अनिवार्य नियम के अनुसार कुंभ मेले पर सिर मुंडाकर, स्वयं अपना श्राद्घ कर संन्यास दीक्षा नहीं ली। फर्जी संतों की सूची बनायी जाए तो वह सैकड़ों में पहुंच सकती है। इसी प्रकार जगद्गुरू पदों का प्रयोग कर रहे संतों की संख्या भी बहुत बड़ी है। नियमानुसार केवल चार संत ही जगद्गुरू पद के अधिकारी है।