पीपलकोटी। वर्ष 2013 की आपदा के चार साल बाद भी स्यूंण-बैमरु क्षेत्र में आवाजाही के लिए लगाई जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक ट्राली का निर्माण आज तक नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि ट्राली के पार्ट्स पीपलकोटी, स्यूंण और बैमरु गांव में लावारिस हालत में पड़े हैं। ट्राली लगाने के लिए शासन से लोनिवि को 24 लाख की धनराशि मिली। विभागीय अधिकारी ठेकेदार को अभी तक करीब 18 लाख रुपये का भुगतान भी कर चुके हैं, लेकिन ट्राली नहीं चली।
स्यूंण-बैमरु क्षेत्र में मेनागाड़ पर निर्मित झूला पुल वर्ष 2013 की आपदा के दौरान बह गया था। तब राज्य सरकार ने यहां इलेक्ट्रॉनिक ट्राली लगाने की स्वीकृति दी। ट्राली निर्माण के लिए ठेकेदार ने वर्ष 2014 में मेनागाड के दोनों ओर आधार तो बनाए, लेकिन ट्रॉली निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया। ऐसे में कई गांवों के ग्रामीणों को आवाजाही के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। स्यूंण-बैमरु गांव के ग्राम प्रधान रविंद्र सिंह का कहना है कि लोनिवि की ओर से ठेकेदार को दो सालों से सिर्फ नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने डीएम से ट्राली निर्माण के जांच की मांग उठाई। इधर, लोनिवि के ईई धन सिंह रावत का कहना है कि ठेकेदार अन्य जगहों पर भी ट्राली लगाने का काम कर रहा है, जिससे यहां का काम पूरा नहीं हो पाया है। ठेकेदार को शीघ्र ट्राली का काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।