देवाल। बोरागाड़ में लगी हाइड्रॉलिक ट्रॉली में तकनीकी खराबी आने से लिंगड़ी गांव का एक ग्रामीण दो घंटे तक ट्रॉली में ही हवा में लटका रहा। बाद में ट्रॉली के चक्के को लोगों ने घुमाया तब जाकर ग्रामीण को सुरक्षित उतारा गया। वहीं, ओडर में लगी ट्रॉली का तेल खत्म होने से कई गांवों के बच्चे स्कूल नहीं जा पाए।
वर्ष 2013 की आपदा से पिंडर नदी के बोरागाड़ और ओडर के झूला पुल बह गए थे। तब ओडर, लिंगड़ी, ऊणीबगड़, बजई, कफलखेत, हड़ाप, सैैंई पातल सहित अन्य गांवों के आवागमन के लिए विभाग ने बोरागाड़ और ओडर में हाइड्रॉलिक ट्रॉली लगाई है लेकिन टॉली आए दिन खराब रहती है। बृहस्पतिवार सुबह सात बजे लिंगड़ी गांव का मोहन सिंह बोरागाड़ आने के लिए ट्रॉली में बैठा था, लेकिन आधी दूरी तय करने के बाद ट्रॉली अचानक बंद हो गई। करीब दो घंटे तक मोहन टॉली में फंसा रहा। बाद में उसके फंसे होने की सूचना पर परिजन मौके पर पहुंचे और ट्रॉली के चक्के को हाथ से घुमाकर मोहन सिंह को सुरक्षित टॉली से पार कराया।
वहीं दूसरी ओर ओडर में लगी ट्रॉली में तेल खत्म होने से स्थानीय बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। लोनिवि के ईई विजय कुमार ने बताया कि बोरागाड़ में कर्मियों को मौके पर भेजकर ट्रॉली ठीक कर दी गई है, जबकि ओडर के लिए जल्द तेल भेजा रहा है।