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बिन पानी नहीं मरेगी मछलियां

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
तीन साल में चार लाख से अधिक मछलियां मरने के बाद मत्स्य पालन विभाग को मछलियों के संरक्षण की याद आ गई है। अब जल के बिना मछलियों को मरने नहीं दिया जाएगा। गंगा बंदी से पहले ही मछलियों को गंगा और गंगनहर से निकालकर नील धारा में डाला जाएगा। यह काम 30 सितंबर से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
गंगा और गंगनहर की सफाई के लिए प्रत्येेक वर्ष दशहरा पर गंगा बंदी की जाती है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग और उत्तराखंड सिंचाई विभाग गंगा सफाई के साथ ही निर्माण कार्य भी पूरे करते हैं। इसके अलावा कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी गंगा सफाई करती हैं। पिछले तीन साल से गंगा बंदी के दौरान सबसे अधिक नुकसान मत्स्य विभाग को हुआ।
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वर्ष 2017 में मछलियों को इस संकट से बचाने के लिए विभाग ने खास योजना तैयार की है। इस योजना के तहत विभाग पहले ही मछलियों को पकड़कर नीलधारा में डाल देगा। नील धारा में हमेशा ही गंगाजल रहता है। जिससे मछलियों को बचाया जा सकेगा। इसके साथ विभाग सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश के अधिकारियों से बातचीत कर रहे है कि गंगा बंदी धीरे- धीरे की जाए। अचानक पानी रोकने से भी मछियां मर जाती है। इस वर्ष 30 सितंबर का दशहरा है, उससे पहले ही विभाग मछलियों को गंगा और गंगनहर से निकालने का काम पूरा कर लेगा।

बिन पानी के मरी लाखों मछलियां
विभाग के अनुसार वर्ष 2014 में 1,15 लाख वर्ष 2015 में 1, 40 लाख और वर्ष 2016 में 1, 45 लाख मछलियां बिना पानी की मर गई। गंगा बंदी से पानी कम होने से मछलियां आगे नहीं जा पाती और उसी स्थान रुक जाती हैं। धीरे- धीरे पानी सूखने पर मछलियां मरने लग जाती है। तीन साल से लगातार मछलियों के मरने की संख्या में इजाफा हो रहा है। गंगा के पानी में रहने वाली मछलियों के अच्छे दाम मिलते हैं।


ग्रामीण इलाकों से आएंगे मछुआरे
मछलियों को पकड़ने के लिए ग्रामीण इलाकों से मछुआरों को बुलाया जाएगा। शहरी क्षेत्र में मछुआरे नहीं मिल रहे हैं। जिस कारण विभाग भगवानपुर, मंगलौर, नारसन और उधमसिंह नगर, रामनगर से मछुआरों को बुलाने की तैयारी कर रही है। जो मछलियों को पकड़कर मुख्य धारा में डालेंगे।

गंगा सभा की ली जाएगी मदद
विभाग इस योजना के लिए गंगा सभा की मदद लेने की तैयारी कर रहा है। गंगा सभा के पदाधिकारियों से बातचीत कर हरकी पैड़ी के आसपास के क्षेत्रों वाली मछलियों को पकड़ने की बातचीत चल रही है। हालांकि अब तक विभाग ने गंगा सभा से बातचीत नहीं की है।
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विभाग का मुख्य कार्य मछलियों का पालन कराना है। इसके साथ ही मछलियों की रक्षा भी करनी होती है। इस बार गंगा बंदी में पहले मछलियों को नील धारा की गंगा में डाल दिया जाएगा।
अनिल कुमार, सहायक निदेशक मत्स्य विभाग
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