अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
मेला अस्पताल में इंटरनेट के उपयोग के लिए डोंगल नहीं होने से मेला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। इससे गर्भवतियों को जननी योजना के तहत निशुल्क अल्ट्रासाउंड का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अधिकारी बार-बार डोंगल खरीदने की प्रक्रिया की बात कहते हैं, लेकिन छह माह से कदम एक ही जगह ठिठके हुए हैं। ऐसे में वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट भी खाली बैठने को मजबूर हैं।
मेला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा के साथ वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डा. राजेश गुप्ता नियुक्त है। लेकिन पिछले महीने से कभी कंप्यूटर खराब तो कभी पेपर या फार्म नहीं होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। सबसे बड़ा नुकसान गर्भवतियों को हो रहा है। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था में दिक्कतें होने से उन्हें 600 रुपये देकर प्राइवेट स्तर पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। अब मेला अस्पताल में दो महीने पहले कंप्यूटर तो ठीक हो गया, लेकिन इंटरनेट चलाने के लिए डोंगल नहीं होने से गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड का काम ठप है। जबकि रेडियोलॉजिस्ट स्वयं अस्पताल के अधीक्षक भी हैं, लेकिन बावजूद डोंगल खरीदने की प्रक्रिया करते-करते दो महीने हो गए, लेकिन डोंगल नहीं खरीदी जा सकी है।
वर्जन
अधीक्षक बदलने पर लेनदेन का अधिकार हस्तांतरण की प्रक्रिया अटकी होने से अस्पताल की व्यवस्था सुधारने में देरी लग रही है। डोंगल खरीदने की प्रक्रिया हो चुकी है, शीघ्र ही काम अल्ट्रासाउंड कराने शुरू कर दिए जाएंगे।- डा. राजेश गुप्ता, सीएमएस, मेला अस्पताल।