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जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों को रोकने में गोपालन ही एक मात्र विकल्प: प्रो. कौल

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श्रीनगर। गोतीर्थाश्रम की ओर से गो-पूजन के साथ गो दिवस मनाया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों से बचने के लिए गो पालन को एक मात्र विकल्प बताया। कार्यक्रम में गोतीथाश्रम को सहयोग करने वाली 40 महिलाओं को भी सम्मानित किया गया।
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बुधवार को गोतीर्थाश्रम में गो दिवस के अवसर पर गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो.जेएल कौल ने कहा कि गाय की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। गाय पर्यावरण की सूचक है। कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों को रोकने में गो पालन ही एक मात्र विकल्प है। प्रति कुलपति प्रो. डीएस नेगी ने गोतीर्थाश्रम के प्रयासों की सराहना करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। गोतीर्थाश्रम के अध्यक्ष प्रेम बल्लभ नैथानी ने प्रधानमंत्री से गो दिवस मनाने का अनुरोध किया। वहीं डा. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि गोवंश किसी भी अवस्था में अनुपयोगी व बोझ नहीं है। बल्कि इसके उचित प्रबंधन की जरूरत है। कहा कि अगर किसान एवं गाय का संबंध फिर से स्थापित कर दिया जाय तो गोरक्षा का प्रश्न हल हो जाएगा। इस मौके पर गोशाला को सहयोग करने वाली 40 महिलाओं को उद्योगपति मोहन काला की ओर से स्मृति चिह्न से सम्मानित किया गया। साथ ही गोमूत्र से संबधित दवाईयां भी दी गई। वहीं पालिका अध्यक्ष विपिन चंद्र मैठानी ने गोतीर्थाश्रम को चारा उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर स्वामी भगत जी ने गोमूत्र से बनाई जा रही 40 प्रकार की दवाइयों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में विमल बहुगुणा, पूर्व अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी, एसडी भट्ट, एसपी घिल्डियाल, प्रदीप रावत, दर्शन सिंह भंडारी, धीरेंद्र भंडारी और युद्धवीर सिंह आदि मौजूद थे।
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