अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ कमेटी कागजों में ही रह गई है। पुराना अतिक्रमण हटाना तो दूर यह कमेटी नया अतिक्रमण भी नहीं रोक पा रही है। आलम यह है कि जनहित में जिला प्रशासन ने रेलवे रोड के जिस नाले को अतिक्रमण मुक्त कराया था, उस पर सात साल बाद हाईकोर्ट की रोक के बाद भी फिर से अतिक्रमण किया जा रहा है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नगर निगम अपने ही बेलदार के कब्जे से टिबड़ी की भूमि खाली नहीं करा पाया है। भल्ला इंटर कालेज के अंदर से रिटायर्ड कर्मचारी का अवैध निर्माण व गोशाला को छेड़ा नहीं गया है। इसको देखते हुए कालेज की एक और कर्मचारी ने सरकारी आवास के ऊपर मंजिल चढ़ा दी है। इसके बावजूद अधिकारी अवैध निर्माण की अनदेखी करते रहे हैं। नगर आयुुक्त ने अतिक्रमण हटाने के लिए सहायक नगर आयुक्त पीके बंसल, प्रभारी अधिशासी अभियंता डीपी उनियाल आदि वरिष्ठ अधिकारियों टीम बनाई थी। यह कमेटी एक दिन भी अपने दफ्तरों से बाहर नहीं निकली है। सिटी मजिस्ट्रेट ने रेलवे रोड पर मारवाडी पंचायती धर्मशाला के किरायेदारों के नाले पर अतिक्रमण कर बनाए गए चार शौचालयों को ध्वस्त कराने का आदेश दिया था। नगर निगम के अधिकारी मौके पर गए और मुआयना करके लौट गए।
नगर निगम की लड़खड़ाती व्यवस्था को भांप कर ही हाईकोर्ट की रोक के बाद भी रेलवे रोड के जल निकासी के सार्वजनिक नाले पर धीरे-धीरे अतिक्रमण कर दुकानें लगनी शुरू हो चुकी हैं। चित्रा टाकीज के सामने, रेलवे के दोनों गेटों के बीच तथा रोडवेज के सामने नाले पर योजनाबद्ध ढंग से अतिक्रमण किया जा रहा है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने भी अपने शहर के साथ बेरुखी अख्तियार कर रखी है।