अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
ऋषिकुल आयुर्वेद परिसर में धांधली से बीएएमएस में प्रवेश लेने के मामले में जांच अधिकारी ने आधे-अधूरे दस्तावेज लेने से इन्कार कर दिया। ऐसे में फिर जांच खटाई में पड़ती नजर आ रही हे। जांच अधिकारी का कहना है कि पूरे दस्तावेज मिलने पर ही जांच आगे बढ़ सकती है। दूसरी तरफ परिसर प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से मिले दस्तावेल जांच अधिकारी को दिए गए, लेकिन उन्होंने नहीं लिए। अन्य दस्तावेल शीघ्र ही उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
उत्तराखंड आयुष प्री मेडिकल टेस्ट (यूएपीएमटी) 2016 की 7 अगस्त को हुई प्रवेश परीक्षा में मुन्ना भाई पकड़े जाने के बाद हुई जांच में 2013 और 2014 बैच के 30 छात्रों की प्रवेश प्रक्रिया संदिग्ध पाए जाने की जांच जारी है। तब कार्रवाई करते हुए परिसर प्रशासन ने 23 अगस्त को सभी तीस छात्रों को निष्कासित कर दिया था। लेकिन तीन महीने पहले उन्हें दोबारा से एडमिशन दे दिया गया। अग्रिम कार्रवाई के लिए जांच अधिकारी दिनेश सिंह ने परिसर निदेशक से मूल दस्तावेज मांगे और शनिवार को वे डाक्यूमेंट लेने पहुंचे थे। करीब पांच घंटे की प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज पूरे नहीं निकले। ऐसे में जांच अधिकारी ने दस्तावेज लेने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि जांच के लिए पूरे दस्तावेज उपलब्ध होने जरूरी हैं। इसके लिए मंगलवार का दिन नियत किया गया, लेकिन डाक्यूमेंट उपलब्ध नहीं हो सके हैं। जांच अधिकारी ने बताया कि ऋषिकुल परिसर प्रशासन की ढिलाई से जांच लटकी हुई है।
विश्वविद्यालय से मिले डाक्यूमेंट जांच अधिकारी को सौंपने के लिए उन्हें शनिवार को बुलाया गया, लेकिन दस्तावेजों में कुछ कमी थी। उन्हें उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क किया जा रहा है। वहां से उपलब्ध होते ही जांच अधिकारी को डाक्यूमेंट उपलब्ध करा दिए जाएंगे। प्रो. सुनील जोशी, निदेशक, ऋषिकुल आयुर्वेद परिसर।