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...आंचल डेरी को बचाने के लिए मंथन

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श्रीनगर। आंचल डेरी (गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ लि.) को घाटे से उबारने के लिए दुग्ध संघ बोर्ड की डेरी विकास संघ और यूसीडीएफ (उत्तराखंड सहकारी दुग्ध फेडरेशन) के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। इस मौके पर कर्मचारियों के वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति), वेतन और बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने पर मंथन किया गया।
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बृहस्पतिवार को गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ लि. के अध्यक्ष हरेंद्रपाल सिंह नेगी की अध्यक्षता में आंचल डेरी में बैठक संपन्न हुई। बैठक में दुग्ध विकास संघ के संयुक्त निदेशक जयदीप अरोड़ा ने बताया कि पौड़ी, चमोली, टिहरी और उत्तरकाशी के दुग्ध संघों से 39 कर्मचारियों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया था। इसमें से 24 कर्मचारी गढ़वाल दुग्ध संघ के हैं। कर्मचारियों के वीआरएस पर पेंशन धनराशि के लिए शासन से 5 करोड़ की डिमांड की गई थी। शासन ने गत 29 अगस्त को 50 लाख रु. मंजूर कर दिए हैं। इस धनराशि को वीआरएस लेने वाले 6 कर्मचारियों में बांटा जाएगा। उन्होंने बताया कि सबसे पहले गढ़वाल दुग्ध संघ के कर्मचारियों को वीआरएस दिया जा रहा है। संघ के अध्यक्ष नेगी ने कहा कि आंचल डेरी की स्थापना 80 के दशक में पहाड़ के पशुपालकों की आजीविका बढ़ाने, स्थानीय लोगों को रोजगार देने और शुद्ध दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने के मकसद से की गई थी। इसको पटरी पर लाना होगा। कहा कि मार्केटिंग बढ़ाने के लिए सभी को बेहतर काम करना होगा। बैठक में यूसीडीएफ के पीसी शर्मा, एएन तिवारी, एके नेगी, डा. कमल सिंह, सहायक निदेशक राम प्रसाद और जेएस मौर्य आदि उपस्थित थे।
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दुग्ध संघ कर्मियों को नहीं मिल रहा समय से वेतन
श्रीनगर। गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि. की आंचल डेरी की व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ रही हैं।
पिछले दो साल में कर्मचारियों को सिर्फ 5 माह ही वेतन मिल पाया है।
डेरी मेें श्रीनगर और कोटद्वार समेत अन्य स्थानों में 42 नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं। जबकि 11 कर्मचारी संविदा पर तैनात हैं, जिनका मानदेय राज्य सरकार देती है। वहीं 42 की सैलरी आंचल डेरी की कमाई से निकाली जाती है, लेकिन पिछले 2 साल में कर्मचारियों को सिर्फ 5 माह की तनख्वाह निकल पाई है। वर्ष 2016-17 में 7 माह की सैलरी नहीं मिली। जबकि वर्ष 2017-18 में अभी तक वेतन नहीं मिला है। मामले में अध्यक्ष गढ़वाल दुग्ध संघ हरेंद्र पाल सिंह नेगी का कहना है कि कर्मचारियों के 4 माह के वेतन के लिए सहकारिता मंत्री ने आश्वस्त किया है। डेरी को घाटे से उबारने के लिए मंथन चल रहा है।
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गोमूत्र शोधन प्लांट को किया जाएगा पुनर्जीवित
गोमूत्र को खरीदेगी पतंजलि आयुर्वेद, शासन स्तर पर किया जा रहा अनुबंध
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। आंचल डेरी में स्थापित गोमूत्र शोधन प्लांट को पुनर्जीवित किया जाएगा। यहां शोधित गोमूत्र को योग गुरु रामदेव की फर्म पतंजलि आयुर्वेद खरीदेगी। इसके लिए शासन स्तर पर पतंजलि के साथ एमओयू (अनुबंध) किया जा रहा है।
बदहाली के दौर से गुजर रही आंचल डेरी को ढर्रे पर लाने के लिए गोमूत्र शोधन प्लांट को पुन: चालू किया जा रहा है। आंचल डेरी में लगभग सात साल पूर्व गोमूत्र शोधन प्लांट लगाया गया था। आंचल डेरी (गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि.) पशुपालकों से 6 रुपये प्रति लीटर के दर से गोमूत्र खरीदती थी। शोधन के बाद अर्क को लगभग 25 रुपये लीटर की दर से बेचा जाता था। पंतजलि आयुर्वेद ने इसे लगभग डेढ़ साल तक खरीदा। इसके बाद अचानक प्लांट बंद कर दिया गया। हाल में मौजूदा सरकार ने सहकारी दुग्ध संघ के माध्यम से पतंजलि आयुर्वेद को गोमूत्र उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसे देखते हुए आंचल डेरी श्रीनगर में स्थित गोमूत्र शोधन प्लांट की सुध ली जा रही है। श्रीनगर पहुंचे डेरी विकास विभाग के संयुक्त निदेशक जयदीप अरोड़ा ने बताया कि प्लांट को ठीक किया जा रहा है। इसके लिए इंजीनियर को बुलाया गया है। सितंबर माह से प्लांट काम करने लगेगा। प्लांट में देशी और इससे मिलती-जुलती प्रजाति की गायों का मूत्र शोधन किया जा रहा है। जल्दी शासन स्तर पर पतंजलि के साथ एमओयू साइन होगा।
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