नारायणबगड़। नंदा धाम बारकोटबार (भंगोटा) में चल रहे पांच दिवसीय नागिनी माता नंदाष्टमी मेले के तीसरे दिन भी लोक कलाकारों ने मां नंदा की जागर और मांगल गीत से आराधना की। लोक गायिका हेमा करासी ने माता शेर मां..., गिर गेंदुवा..., लोक गायक प्रदीप बुटोला ने नंदा तेरी जात पेटण लगिगे..., भोले बाबा तू है निराला... तथा कुलदीप कपर्वान ने जै अंबा जगदंबा..., कैलाश मां रोंदा शिव भोले... की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सोमवार को ब्रह्ममुहूर्त में पंडितों ने पंचांग पूजा के बाद भारकोटबार से भूमियाल देवता की अगुवाई में बाजे-गाजों के साथ सैकड़ों भक्त केले के पेड़ लाने के लिए तुनेड़ा गांव रवाना हुए। और इस दौरान भूमियाल देवता ने चोपता चौंरी में सिद्धपीठ मां राजराजेश्वरी नंदा देवी के मंदिर की परिक्रमा कर देवी को वस्त्र और आभूषण अर्पित किए। आचार्यों ने मां नंदा तथा भूमियाल देवता की वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ पूजा की। इसके बाद तुनेड़ा गांव में भूमियाल देवता के पश्वा ने बागवान में जाकर केले के पेड़ को न्योता और पुजारियों ने पेड़ की पूजा की। श्रद्धालु नागिनी माता, नंदा देवी और भूमियाल देवता की जयकारों के साथ केले के पेड़ को नंदा देवी मंदिर भारकोटबार लाए। यहां केले के पेड़ के तने पर मां नंदा देवी की आकृति उकेरी और मंदिर में प्रतिस्थापित किया। भक्तों ने मां नंदा और नागिनी देवी की स्तुति की। इससे पूर्व रविवार को मेले की दूसरी सांस्कृतिक संध्या में जागर सम्राट बुद्धि सिंह दानू, गंगाराम सती, दामोदर सती, अन्नू उनियाल के जागरों और लोक गायक प्रदीप बुटोला के भजनों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। इस मौके पर ज्येष्ठ उप प्रमुख गंभीर सिंह नेगी, मेला समिति के अध्यक्ष राजेेंद्र सिंह मिंगवाल, विशंबर दत्त सती, जगदीश प्रसाद सती सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालुुओं ने मेले में प्रतिभाग किया।