अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कलियुग में श्रीगणेश को सर्वश्रेष्ठ देवता कहा गया है। समूचे ब्रह्माड्डड में उन्हें प्रथम पूज्य देवता कहा जाता है। गणेश अनंत फलों के दाता हैं। पूजा पंडालों में गणपति बप्पा के संकीर्तन दूसरे दिन भी चलते रहे। भजन संध्याओं का आयोजन हुआ और धर्मनगरी में जय श्रीगणेश के स्वर गूंजते रहे।
भगवान गणेश का अभिषेक प्रतिदिन अब नए- नए द्रव्यों से होगा। पहले दिन चौक चाकड़ी के लड्डू का भोग भक्तों ने लगाया। दूसरे दिन बेसन के लड्डू भोग में वितरीत किए गए। अब प्रतिदिन क्रमवार दूर्वा, घृत, शहद, चावल, श्रीफल, स्वर्ण, रजत, तिल, पुष्प, कपूर, इलायची, लौंग, सुपारी आदि से भोग के रूप में सहस्त्रार्चन किया जाएगा। अनेक रोगों के निदान के लिए विभिन्न प्रकार के अभिषेक शास्त्रों में बताए गए हैं। स्कंदपुराण में गणपति महिमा का विशद विवरण मिलता है। पूजा के दूसरे दिन सभी पंडालों में प्रात:काल विशेष पूजा का ओयोजन किया गया। ऋषिकुल विद्यापीठ में आयोजित गणपति सेवा संघ के महोत्सव में मेयर मनोज गर्ग ने नगर को स्वच्छ रखने का संकल्प पूजा के अवसर पर कराया। गणपति की महाआरती मनोज गर्ग के साथ-साथ शहरी विकास मंत्री के प्रतिनिधि मुकेश कौशिक ने की। इस अवसर पर करिश्मा ग्रुप, मेघा ग्रुप तथा अन्य कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी। श्रवणनाथ मठ के पंडाल में भजन संध्या आयोजित की गई। चौक बाजार ज्वालापुर स्थित भाईजी के मंदिर में गणपति महोत्सव के अवसर पर सभी देवी देवताओं का पूजन किया गया। ज्वालापुर की सिराज धर्मशाला और पुरानी अनाज मंडी में भी गणपति बैठाए गए हैं। इसी प्रकार कनखल नगरी के तमाम मंदिरों में गणपति वंदना की गई।
पूजा पंडालों में दिन के समय तो कम श्रद्धालु पहुंचे, किंतु प्रात: और सांयकाल अधिक भक्तो ं की भीड़ रही। सभी पंडालों में शाम के समय भगवान गणेश की भव्य आरती उतारी गई।