अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धनसिंह रावत ने उत्तराखंड संस्कृत विवि में गणेश चतुर्थी पर पूजा कर 51 फीट ऊंचा झंडा फहराया। कहा कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा में शामिल करने के लिए फाइल को आगे बढ़ा दिया गया है।
शुक्रवार को उत्तराखंड संस्कृत विवि में गणपति पूजन-राष्ट्रध्वज वंदन समारोह में मुख्य अतिथि डा. धनसिंह रावत ने कहा कि डिग्री कालेजों में संस्कृत, वेद और योग को अनिवार्य विषय के रूप में लागू किया जाएगा। इससे रोजगार मिलने के साथ ही प्रदेश की द्वितीय राजभाषा संस्कृत का भी विकास होगा। डिग्री कालेजों में छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 10 प्रतिशत अतिरिक्त एडमिशन देने के आदेश दिए गए हैं। इसके लिए कोर्ट में शपथपत्र भी प्रस्तुत कर दिया गया है।
कहा कि राज्य में ढाई लाख छात्रों एवं दस हजार शिक्षक-कर्मचारियों का जीरो बैलेंस पर निशुल्क बीमा योजना चलाई गई है। कोई छात्र विदेश में एमबीबीएस, आईआईटी या शोध करना चाहता है, तो उसके लिए सरकार पचास लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराएगी। देश में पढ़ने वाले गरीब छात्र 10 लाख रुपये बैंक से ऋण प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि देश के 100 विश्वविद्यालयों की रैकिंग में उत्तराखंड का नाम शामिल करने के लिए 180 दिन पढ़ाई, सात दिन में छात्र संघ चुनाव, 30 दिन में परीक्षा परिणाम और 40 दिन में पेपर होने जरूरी हैं। प्रोफेसरों को मकान के लिए 20 से 50 लाख तथा वाहन के लिए 10 से 20 लाख तक ऋण देने की व्यवस्था की गई है। प्रोफेसरों की नियुक्ति में आयु सीमा में छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है। कुलपति प्रो. पीयूषकांत दीक्षित ने विचार रखे। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष अनूप बहुखंडी, एबीवीपी के प्रदेश उपाध्यक्ष नवीन पंत, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विवेक ममगाईं, शिवचरण नौटियाल, धीरज सिंह, हरि जोशी, नीरज आदि मौजूद रहे। एबीवीपी के संस्कृत प्रदेश प्रमुख विकास जोशी, चंद्र प्रकाश पांडे, रविंद्र, कुलदीप भट्ट, रीतेश आदि छात्रों ने मंत्री का स्वागत किया। इस असवर वित्ताधिकारी डा. तंजीम अली, डा. अरविंद नारायाण मिश्र, डा. मनोज किशोर पंत, डा. राकेश सिंह, डा. रत्न लाल, मनोज गहतोड़ी आदि मौजूद थे।