अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
पंचपुरी के दर्जनों स्थानों पर भगवान गणेश की विशाल प्रतिमाएं स्थापित की गई। हजारों लोगों ने अपने घरों में भी गणपति की मूर्ति स्थापित की। अब दस दिनों तक सभी जगहों पर अनुष्ठान चलते रहेंगे। चर्तुदशी के दिन शोभायात्राएं निकालकर गणपति प्रतिमाएं मां गंगा में विसर्जित की जाएंगी। ऋषिकुल के मैदान में गणपति की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई। श्रवणनाथ मठ के प्रांगण में नगर का सबसे प्राचीन गणपति महोत्सव धूमधाम से शुरू हुआ। गणपति प्रतिमा को शोभायात्रा के रूप में पंडाल तक लाया गया। हनुमान घाट पर नींबू वाले घेर में गणपति बैठाए गए। गीता भवन में शोभायात्रा निकालकर श्रीगणेश की स्थापना की गई। ज्वालापुर में चौक बाजार स्थित भाईजी के मंदिर में पं. शिवप्रसाद रमन के सानिध्य तथा पुरानी अनाज मंदिर में परंपरागत रूप से गणेश प्रतिमाएं स्थापित हुई। फेराहेडियान, चाकलान और धीरवाली पर भी पंडाल सजाए गए। पांडेवाला के प्रांगण में गणपति स्थापना हुई। कनखल में अनेक स्थानों पर धूमधाम से गणपति बैठाए गए। इमली मोहल्ले में गणपति की स्थापना विशेष रूप से की गई। दक्ष प्रांगण में भगवान गणेश श्रद्धापूर्वक स्थापित किए गए। उत्तरी हरिद्वार के सप्तसरोवर और भूपतवाला क्षेत्रों के अनेक आश्रमों में गणपति की स्थापना हुई। गणपति यात्रा संघ मोतीबाजार की ओर से गणपति महोत्सव में महंत लाखन गिरि ने गणपति स्थापित किए। यात्रा संघ के महेश जोशी, सुनील गर्ग, संदीप शर्मा, शैली चोपड़ा आदि ने गणेश का गुणगान किया। पुरानी सब्जी मंडी ज्वालापुर में चौहान सभा ने गणपति प्रतिमा की स्थापना की। अरविंद चौहान ने पूजन किया। ज्वालापुर पुरोहित धर्मशाला में पं. हरिओम जयवाल शास्त्री, नंदकिशोर व्यास, आशीष गौतम के सानिध्य में सिद्धि विनायक सहस्त्रार्चन द्रव्य एवं लाभ अनुष्ठान शुरू हुआ।
इस बार प्लास्टर ऑफ पेरिस के बजाय नगर वासियों ने मिट्टी के गणेश खरीदे। इन गणेश मूर्तियों को ठोल बाजों और बैंडबाजों के साथ घरों तक लाया गया। गणपति संघ के अनुसार हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में करीब पांच हजार स्थानों पर गणपति बैठाए गए हैं। पंडालों में कार्यक्रम देने के लिए बाहर से भी कलाकार बुलाए जा रहे हैं।