अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
पार्वती के तप से जुड़ा हरितालिका पर्व पंचपुरी में गौरा तीज के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। सुहागवती महिलाओं ने पति और घर की समृद्धि के लिए व्रत रखकर फलाहार ग्रहण किया। पार्वती की पूजा के बाद बायने निकाले गए। पार्वती के साथ-साथ गौरी शंकर के मंदिरों में भी श्रद्धालु महिलाएं पूजनार्थ पहुंची।
हरितालिका पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाता है। पंचपुरी में इसे गौरा तीज कहा जाता है। अनेक कुंवारी कन्याएं भी गौरा तीज पर अच्छा पति और अच्छा घर पाने की कामना को लेकर व्रत रखती हैं। मान्यता है कि आज के दिन व्रत रखने पर मुराद अवश्य पूरी होती है। याद रहे कि इसी हरिद्वार के गौरी कुंड पर पार्वती ने वर्षों बैठकर शिव को पाने के लिए तप किया था। भगवान भोलेनाथ हिमतनया के व्रत से प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन दिए। तब पार्वती ने शिव को पति रूप में मांग लिया। शिव ने पार्वती का प्रतिवेदन स्वीकार किया और गौरी को पत्नी रूप में स्वीकार कर गौरी शंकर बनकर गए। भगवान शिव ने गौरी के साथ पहला विश्राम नीलधारा के उस पार वर्तमान गौरी शंकर स्थल पर किया। शिव और पार्वती के मिलन के स्वरूप गौरी कुंड के साथ-साथ गौरी शंकर में भी भक्त महिलाओं ने जाकर पूजा अर्चना की।
गौरा तीज के दिन महिलाएं अन्न जल त्याग कर व्रत रखती है और सायंकाल पार्वती की पूजा के बाद पकवान के बायने निकालती हैं। अनेक प्रकार के वस्त्र और सुहाग का सामान दान कर सुहागिन महिलाओं को दिया जाता है। महिलाएं रात के समय एक समय फलाहार कर व्रत तोड़ती हैं। पंचपुरी के ज्वालापुर और कनखल में यह पर्व मां गौरा के प्रति श्रद्धानवत होकर मनाया गया। हाल में ब्याही पुत्रियों को विभिन्न प्रकार का सामान भेजा गया। पंचपुरी के अन्य भागों में भी गौरा तीज हरितालिका के रूप में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाई गई। अनेक महिलाओं ने सामूहिक रूप से शिव मंदिरों में जाकर हरितालिका की कथा का श्रवण किया।