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योजना क्षतिग्रस्त होने से चार गांवों में गहराया पेयजल संकट

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श्रीनगर। पेयजल योजना क्षतिग्रस्त होने से चार गांवों की हजारों की आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है। ग्रामीण अलकनंदा नदी व गदेरे के गंदे पानी से प्यास बुझाने को मजबूर है। योजना पर पेयजल आपूर्ति सुचारु न होने पर ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
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विकास खंड कोट के बिल्वकेदार, नकोट, अरकणी, दिगोलियों के ग्रामीण विगत एक माह से पेयजल संकट से जूझ रहे है। ग्रामीण राम सिंह नेगी ने बताया कि योजना के स्रोत पर मलबा आने व कई जगहों पर भू-धंसाव होने से योजना क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में ग्रामीणों की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई, लेकिन यह व्यवस्था भी ग्रामीणों की प्यास बुझाने में नाकाम हो रही है। ग्राम प्रधान रजनी नेगी ने बताया कि उक्त तोकों की करीब चार सौ की आबादी के लिए पेयजल योजना का निर्माण किया गया था, लेकिन आज क्षेत्र की आबादी करीब दस हजार तक पहुंच चुकी है। बताया कि उनके गांव के लिए शासन की ओर से वर्ष 2016 में करीब 95 लाख की लागत की पेयजल योजना स्वीकृत हुई थी, लेकिन योजना पर पूरा बजट न मिलने से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। पेयजल आपूर्ति सुचारु न होने पर समाजसेवी भवानी रावत, उम्मेद सिंह मेहरा, बादर सिंह, सुरेंद्र सिंह, रूकम सिंह, यशवंत सिंह, त्रिलोक सिंह आदि ने आंदोलन की चेतावनी दी है। मामले में सहायक अभियंता पेयजल निगम पौड़ी सतेंद्रपाल सिंह ने कहा कि बजट न मिलने से पेयजल योजना का निर्माण कार्य बंद पड़ा है। बजट मिलते ही कार्य शुरू करवा लिया जाएगा।
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