राजेश शर्मा
हरिद्वार।
किट्टी पार्टी चलाने के नाम पर लोगों के करोड़ों रुपये ऐंठने के आरोपों से घिरे जीआईजी मार्ट के संचालक दंपत्ति के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज होने के बाद यहां लंबे समय से चल रहे कमेटी, किट्टी और निजी फाइनेंस कंपनियों के गोरखधंधे ने एक बार फिर अपना ध्यान लोगों की तरफ खींचा है। पिछले तीन दशक में दर्जनों ऐसे मामले सामने आए हैं, जब कम समय में मोटा मुनाफा कमाने के लालच में कई बार लोग ठगे गए। लोगों को लालच दिखाकर ऐसे ग्रुप चलाने वाले लोग अपने जाल में फंसाते रहे हैं।
1990 के दशक में वित्तीय कारोबार करने वाली सत्यम कंपनी हरिद्वार, ज्वालापुर और भेल के हजारों लोगों को कई करोड़ की चपत लगाकर रातोंरात फरार हो गई थी। ज्वालापुर में निजी फाइनेंस कंपनी चलाने वाले कांग्रेस नेता मोटा मुनाफा देने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये जमा कराकर शहर ही छोड़ भागे थे। 90 के दशक में ही कमेटियों के नाम पर फाइनेंस का कारोबार करने वाली महिलाओं का मामला कई बार पुलिस तक पहुंचा तो कई बार सड़कों पर मारपीट भी हुई। बाद में अधिकारियों के चक्कर काटकर अपनी मेहनत की कमाई जमा करने वाले लोग शांत होकर घर बैठ गए। महिलाओं को सदस्य बनाकर उनके करोड़ों रुपये लेकर रातोंरात चंपत होने के दर्जनों मामले तो दो-चार दिन तक चर्चा में रहने के बाद शांत ही हो गए। ज्वालापुर में माता की चौकी चलाने वाली एक महिला ने पहले अपने साथ सैकड़ों महिलाओं को जोड़ा उसके बाद उनसे कमेटी के रूप में लाखों रुपये जमा कराए तथा रातोंरात परिवार के साथ चंपत हो गई।
कई सालों तक देश के कई हिस्सों में काम करने वाली एक फाइनेंस कंपनी के निदेशक मंडल में शामिल होने के कारण पूर्व क्रिकेटर मनोज प्रभाकर के खिलाफ भी हरिद्वार की अदालतों में मामले चलते रहे हैं। अब नए दौर में लोगों से पैसा जमा कराने का नया ट्रेंड किट्टी के रूप में सामने आया है। लोग इस बात को लेकर हैरत में हैं कि बार-बार लोग ऐसे धंधेबाजों के जाल में फंस जाते हैं। एसपी सिटी ममता बोहरा का कहना है कि जहां -जहां से भी इस तरह की धोखाधड़ी की शिकायत आएगी उन पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन लोगों को इस तरह के धंध बाजों के जाल में फंसने से बचना चाहिए। वित्तीय सुरक्षा की गारंटी देने वाले बैंक और पंजीकृत कंपनियों के साथ ही लेनदेन रखना चाहिए।