श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्र की रैगिंग मामले में दो सीनियर छात्रों को एक सेमेस्टर (छह माह) के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। इस अवधि में दोनों छात्र कॉलेज की किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकेंगे। इस दौरान उन्हें हॉस्टल भी छोड़ना होगा। कॉलेज की एंटी रैगिंग समिति ने सीनियर छात्रों को रैगिंग न लेने की हिदायत दी है। समिति ने रैगिंग होने पर कॉलेज प्राचार्य को इसकी सूचना देने को कहा है। वहीं, छात्रों को सस्पेंड किए जाने के विरोध में उनके बैचमेट प्रशासनिक भवन के समक्ष कुछ देर धरने पर बैठे रहे।
14 अगस्त को एमबीबीएस प्रथम बैच के एक छात्र ने 9, 10 और 12 अगस्त को उसके साथ छात्रावास में मारपीट, डराने-धमकाने और परेशान करने की शिकायत एंटी रैगिंग हेल्प लाइन नई दिल्ली से की थी। मेल के जरिए की गई इस शिकायत के क्रम में सोमवार को एंटी रैगिंग समिति ने पीड़ित छात्र, उसके रुममेट और सीनियर छात्रों से पूछताछ की। पीड़ित छात्र ने एमबीबीएस तृतीय वर्ष के कुलदीप चंद्रा और चंद्रेश मर्तोलिया की पहचान की। दोनों छात्रों ने भी पीड़ित छात्र से नाम-पता पूछने की बात स्वीकारी। हालांकि मारपीट के आरोप से उन्होंने इनकार किया। आरोपों की पुष्टि होने पर समिति ने दोनों सीनियर छात्रों को रैगिंग का दोषी पाया।
समिति के अध्यक्ष कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने बताया कि कुलदीप और चंद्रेश को एक सेमेस्टर के लिए कॉलेज की शैक्षणिक गतिविधियों और छात्रावास से निलंबित कर दिया गया है और इसकी सूचना एंटी रैगिंग हेल्प लाइन को भी भेज दी गई है।