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एक बैंक शाखा के भरोसे हजारों की आबादी

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अमर उजाला ब्यूरो
धनौरी।
घाड़ क्षेत्र के एकमात्र मुख्य केंद्र धनौरी कई वर्षों से एक राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा को तरस रहा है। अब तक क्षेत्र की करीब चालीस हजार की आबादी सिर्फ एक ही राष्ट्रीयकृत बैंक पर निर्भर है। जिससे ग्रामीणों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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धनौरी क्षेत्र में करीब डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों की आबादी करीब चालीस है। इसके बावजूद यहां सिर्फ एक ही राष्ट्रीयकृत बैंक है, जिसमें ग्रामीणों को पैसों की लेनदेन के ट्रांसजेक्शन के लिए घंटों लाइन मे लगकर इंतजार करना पड़ता है। आबादी अधिक होने से यहां एकमात्र ओबीसी बैंक मे ग्रामीणों की भीड़ मेले के सापेक्ष लगी रहती है। इस एकमात्र बैंक में हजारों किसानों के गन्ना भुगतान के खातों के अलावा यहां की कई शिक्षण संस्थाओ के छात्र- छात्राओं के छात्रवृत्ति के खातों के साथ- साथ ग्रामीणों के निजी बचत खाते भी इसी बैंक में है। नोटबंदी के दौरान भी एकमात्र बैंक के भरोसे ग्रामीणों को नोट बदलवाने एवं पैसे निकालने को लेकर बेहद परेशानियों से जूझना पड़ा था। ग्रामीण अरविंद, निर्मल सिंह, राकेश सैनी, माधोराम, संदीप, अनूप कुमार, अशोक, आशु, विक्की आदि ने बताया कि बैंक मे भीड़ होने से पैसे जमा एवं निकालने में हायतौबा मची रहती है। वहीं भारतीय उत्थान परिषद के अध्यक्ष अंकित कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने धनौरी मे अन्य राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा खोलने के लिए एलडीएम हरिद्वार एव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से पत्राचार भी किया, लेकिन समस्या का समाधान नही हो पाया है।
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