घाट (चमोली)। सिद्धपीठ कुरुड़ से दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियां मंगलवार को अपने भक्तों से विदा लेकर कैलाश के लिए प्रस्थान करेंगी। इसी के साथ श्री नंदा लोकजात यात्रा भी शुरू हो जाएगी। इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा की जाएगी। सोमवार को मंदिर में पहुंचे नंदा भक्तों ने मां नंदा की पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की कुशलता की कामना की।
13 अगस्त को दशोली और बधाण की मां नंदा कैलाश जाने के लिए कुरुड़ मंदिर के गर्भगृह से मंडप में स्थापित हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मुंशी चंद्र गौड़, योगेश्वर प्रसाद, राकेश, कन्हैया प्रसाद, मंशाराम, मनोहर, सत्य प्रसाद, धनीराम और राजेश गौड़ ने गणेश पूजा के बाद मां नंदा की पूजाएं संपन्न की। सोमवार को दिनभर मंदिर में मां नंदा की पूजाएं संपन्न हुई। इधर, कुरुड़ गांव में आयोजित तीन दिवसीय नंदा लोकजात सांस्कृतिक मेले के दूसरे दिन थराली के पूर्व विधायक प्रो. जीतराम ने मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए सभी को आगे आने का आह्वान किया। कहा कि मां नंदा के धाम कुरुड़ को विश्व मानचित्र पर जगह दिलाने के लिए संघर्ष किया जाएगा। स्कूली छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं। संस्कृति विभाग की ओर से गायक प्रदीप बुटोला ने मां नंदा के जागरों की प्रस्तुति दी। महिला मंगल दल की महिलाओं ने भी नंदा जागर गाए। इस मौके पर मेला समिति के अध्यक्ष पंकज गौड़, ब्लॉक प्रमुख कर्ण सिंह, प्रकाश गौड़, ग्राम प्रधान सुनील कुमार, क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेंद्र सिंह बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य गुड्डू लाल, तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़, राकेश गौड़, लक्ष्मण सिंह राणा आदि मौजूद थे।