अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। अपने आश्रम के मुख्य गेट पर कूड़ा फेंक देने से बेहद खफा कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश भाजपा नेतृत्व को अपने कद का अहसास कराकर ही दम लिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट जब उन्हें नहीं मना पाए तब राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से भी करीब 24 मिनट की बातचीत के बाद महाराज ने अनुशासन समिति की जांच को लेकर हामी भरी।
प्रेमनगर आश्रम की दीवार तोड़ने से लेकर मुख्य गेट पर कूड़ा फेंकने का विवाद जब दिल्ली दरबार में पहुंचा तब विवाद को तुरंत सुलझाने की एक्सरसाइज शुरू कर दी गई। सतपाल महाराज की राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शह से करीबी जगजाहिर है लिहाजा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को हरिद्वार पहुंचकर विवाद सुलझाने के लिए कहा। प्रदेश अध्यक्ष ने सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, विधायक आदेश चौहान, स्वामी यतीश्वरानंद, सुरेश राठौर, संजय गुप्ता, जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह चौहान, प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश जमदग्नि, जिला प्रभारी अनिल गोयल को प्रेमनगर आश्रम में बुलाया। इसके बाद कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के साथ वार्ता का दौर शुरू हुआ। सूत्रों की मानें तो सांसद और विधायकों ने जहां सतपाल महाराज की हां में खुलकर हां मिलाई वहीं कुछ विधायकों ने कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक को भी निशना बनाया। मेयर मनोज गर्ग पर तो सभी ने हमला बोला। करीब डेढ़ घंटे तक चली बैठक के बाद सांसद और विधायक कमरे से निकल आए तब तक महाराज टस से मस नहीं हुए थे। वे अपने आश्रम की खराब हुई छवि की भरपाई के लिए अड़े हुए थे। इसके बाद भी प्रदेश अध्यक्ष और जिला प्रभारी ही महाराज की मान मनौव्वल में जुटे रहे। जब महाराज अडिग रहे तो फिर आखिर में प्रदेश अध्यक्ष ने राष्ट्रीय अध्यक्ष से महाराज की अपने मोबाइल फोन से बात कराई। सूत्रों के अनुसार करीब 24 मिनट हुई बातचीत में सतपाल महाराज ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष अपनी बात रखी। आखिर में पूरा मामला अनुशासन समिति को सौंपे जाने पर महाराज मान गए। हालांकि, महाराज की मान मनौव्वल में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के भी पसीने छूट गए, अंत में पूरे प्रकरण की गेंद राष्ट्रीय अध्यक्ष के पाले में ही डालनी पड़ गई।