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हरीश रावत के शासनादेश के खिलाफ अभा पुरोहित महासभा

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अमर उजाला ब्यूरो
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हरिद्वार। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा ने रविवार को मथुरा में हुई महासभा कार्यकारिणी की बैठक में उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में पारित किया गया गंगा शासनादेश तत्काल निरस्त करने की मंाग की है। प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आग्रह किया गया है कि वे पूर्व सरकार द्वारा हरकी पैड़ी को नहर मानने संबंधी शासनादेश रद्द करे। उधर सुरेश्वरी देवी प्रबंध समिति ने संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत से मिलकर गंगा शासनादेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
अखिल भारतीय महासभा की बैठक की जानकारी राष्ट्रीय महामंत्री श्रीकांत वशिष्ट ने दूरभाष पर दी। उन्होंने बताया कि देशभर से आए पुरोहितों ने इस बात पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है कि हरीश रावत सरकार ने चुनावी अधिसूचना जारी होने से तीन दिन पूर्व हरकी पैड़ी पर युगों से बह रही गंगा को नहर बताने का कुकृत्य किया है। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि भूमाफिया को उच्च न्यायालयों और एनजीटी के उस शासनादेश से मुक्ति मिल जाए, जिसमें गंगातट से 200 मीटर क्षेत्र में किसी भी नवनिर्माण पर प्रतिबंध लगाया गया है। बैठक में इसके लिए सीधे-सीधे भ्रष्टाचार के घिनौने खेल को जिम्मेदार ठहराया गया। चेतावनी दी है कि यदि त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकार ने एक महीने के भीतर पिछली सरकार का शासनादेश वापस न लिया, तो देश व्यापी आंदोलन पूरे गंगा क्षेत्र के पांच राज्यों में महासभा द्वारा शुरू कर दिया जाएगा। सभी जगह महासभा की इकाइयां मौजूद हैं।
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उधर सिद्धपीठ सुरेश्वरी देवी मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारियों ने प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत से भेंट कर और उन्हें ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि गंगा को नहर बनाने संबंधी शासनादेश को तत्काल निरस्त किया जाए। प्रतिनिधि मंडल में मंदिर प्रबंध समिति के महामंत्री सुरेंद्र मारवाड़ी, कमलेश सक्सेना, अम्बरीष पांडे, आशीष कुमार, गोपाल गोस्वामी, नंद किशोर सरैये, राकेश चाकलान आदि शामिल थे। प्रकाश पंत ने आश्वासन दिया है कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से वार्ता कर गंगा को नहर बताने वाला शासनादेश वापस लिया जाएगा।
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