हरिद्वार। बृहस्पतिवार को मेयर और सतपाल महाराज के समर्थकों के बीच हुए संघर्ष के बाद नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के आश्रम के बाहर डाला गया कूड़ा विवाद के समाधान में बाधक बन गया है। निगम के कर्मचारियों ने मेयर के आग्रह को स्वीकार करते हुए शहर भर में तो काम करना शुरू कर दिया लेकिन प्रेमनगर आश्रम के बाहर पड़ा कूड़ा नहीं उठाया , हालांकि इस कूड़े को नहीं उठाए जाने को लेकर दोनों ही पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं लेकिन कूड़े का यह ढेर राजनीति का बड़ा अखाड़ा बन गया है। प्रेमनगर आश्रम के सेवक इस कूड़े को ही अपने आंदोलन का आधार बना रहे हैं।
मेयर पर हुए हमले के बाद नगर निगम के कर्मचारियों ने कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उनके आश्रम के मुख्यद्वार के बाहर शहर भर से कूड़ा इकट्ठा कर डाल दिया था। इसके बाद से प्रेमनगर आश्रम के सेवक आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रेमनगर आश्रम के सेवकों का तर्क है कि जिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री देश में स्वच्छ भारत अभियान चलाते हैं उसी पार्टी के मेयर के इशारे पर आश्रम के मुख्यद्वार पर कूड़ा फेंका जाता है। इसे मुद्दा बनाकर पार्टी हाईकमान से कार्रवाई की मांग भी की जा रही है।
इस बीच नगर निगम के कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर पूरे शहर में तो कूड़ा उठाने का काम शुरू कर दिया लेकिन विवाद के निपटारे में बाधक बने इस कूड़े को उठाया नहीं जा सका जबकि यह सबसे पहले किया जाना था। इस बारे में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रवीण कुमार ने बताया कि नगर निगम के कर्मचारी लगातार आश्रम के सेवकों के संपर्क में हैं फिलहाल आश्रम की ओर से कूड़ा नहीं उठने दिया जा रहा है जबकि आश्रम ट्रस्ट के सचिव रमणीक भाई ने बताया कि नगर निगम की ओर से कूड़ा हटाने को लेकर उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया है। जिन्होंने कूड़ा डाला है अगर वे उठाते हैं तो वे उठा लें उन्हें क्या आपत्ति है। बहरहाल कूड़े का यह ढेर बवाल के निपटारे में बाधक बन गया है। सत्ता के दो धुरों से जुड़ा मामला होने के कारण प्रशासन खुद कोई पहल करने के बजाय केवल निर्देश मिलने का इंतजार कर रहा है।
उम्मीद जताई जा रही है कि रविवार को कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के हरिद्वार आगमन पर विवाद को कोई न कोई निस्तारण निकल जाएगा।