अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
प्रेमनगर आश्रम की दीवार तोड़ने से शहर में अराजकता का माहौल पैदा होने के बाद भी पुलिस खामोश बैठी है। बड़ा सवाल यही है कि आखिर अराजकता फैलाने वाले एक भी व्यक्ति की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई। हाईप्रोफाइल शख्सियतों से जुड़ा प्रकरण होने से पुलिस घटनाक्रम से लेकर अब तक तमाशबीन ही बनी हुई है।
क्रॉस एफआईआर की जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। घटनाक्रम के दौरान पुलिस की स्थिति बीच बचाव करने की ही थी। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और मेयर मनोज गर्ग के समर्थक खुलेआम सड़क पर मनमर्जी कर रहे थे। हाथ में लाठी डंडे लेकर एक- दूसरे पर पिले हुए थे और कानून व्यवस्था ताक पर रख दी गई थी। मौके पर पहुंची पुलिस खामोश ही रही और केवल दोनों पक्षों की मान मनौव्वल में ही जुटी रही। यदि पुलिस सख्ती से काम लेती तो कानून व्यवस्था का मजाक न उड़ाया जाता। नगर निगम के कर्मचारियों ने कूड़े का ढेर आश्रम के मुख्यगेट पर लगाकर ताकत का अहसास कराया तो आश्रम से जुड़े लोगों ने दो बार पथराव किया। जब पथराव हुआ तब पुलिस भी मौजूद थे। पर हाईप्रोफाइल शख्सियतों से जुड़ा मामला होने के चलते पुलिस ने हरकत में आना ठीक न समझा।
तीन दिन गुजरने के बाद भी क्रॉस एफआईआर होने पर कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। बड़ी बात ये है कि कानून व्यवस्था को हाथ में लेने के मामले को हरिद्वार पुलिस बेहद ही हल्के में ले रही है। अराजकता फैलाने वाले हर व्यक्ति की गिरफ्तारी होनी जरूरी है फिर चाहे वो किसी भी पक्ष से ताल्लुक रखता हो। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि मामले की जांच चल रही है।