अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
उत्तराखंड की लोक संस्कृति दिल्ली समेत उत्तर भारत में अपना जलवा बिखेरती नजर आएगी। देवभूमि लोक कला सोसायटी के नरेंद्र पांथरी ने कई कलाकारों को दिल्ली का बुलावा भेजा है। इस वर्ष सितंबर से जून वर्ष 2018 तक कलाकारों को काम करने के लिए बुलाया गया है।
दिल्ली, गुजरात, अहमदाबाद, चंडीगढ़, मुंबई समेत कई बड़े शहरों के अलावा समूचे उत्तर भारत में उत्तराखंड की संस्कृति ढोल और दमाऊं की डिमांड हो रही है। संगीत नाट्य अकादमी संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सदस्य नरेंद्र पांथरी दिल्ली में अपनी एक सोसायटी बनाकर चला रहे हैं। जहां उत्तराखंड के कलाकारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनकी मानें तो हर वर्ष कलाकारों की मांग बढ़ रही है। इस वर्ष सितंबर माह से अगले वर्ष जून तक कलाकारों की डिमांड है। नरेंद्र पांथरी बताते हैं कि पूरे उत्तर भारत से उनके पास कार्यक्रम की बुकिंग है। कलाकारों को दिल्ली ले जाने के लिए ही वह कार्यक्रम में आए हैं। हरिद्वार में चल रही पांच दिवसीय ढोल और दमाऊं की कार्यशाला में उन्होंने कई कलाकारों को दिल्ली आने का निमंत्रण दिया है। कलाकार को आने जाने का खर्च और रहने की व्यवस्था के अलावा दैनिक भुगतान भी दिया जाएगा।
कहा आ रही दिक्कतें
हरिद्वार। उत्तराखंड के कई कलाकार दिल्ली में स्टेज शो के अलावा कई अन्य प्रोग्राम कर चुके हैं। कलाकार दिल्ली जाकर कार्यक्रम को अच्छी तरह बजा रहे है, लेकिन उसके बाद कुछ कलाकार शराब पीकर अव्यवस्था भी फैला दे रहे हैं। जिस वजह से कुछ लोग दोबारा ढोल और दमाऊं बजाने वालों को नहीं बुला रहे है।
सरकार से नाराज हैं वादक
हरिद्वार। ढोल और दमाऊं बजाने वाले कलाकार सरकार से काफी नाराज है। आखिर हो भी क्यों न। सरकार ने कलाकारों ने किसी भी तरह की कोई मदद नहीं की है। कलाकारों का मानना है कि सरकार इसको रोजगार से जोड़े तो ही संस्कृति जिंदा रह पाएगी। नई पीढ़ी ढोल और दमाऊं को बजाने से इनकार कर रही है। उनका कहना है कि सरकार को जल्द ही इस पर उचित निर्णय लेना होगा।