श्रीनगर। मौजूदा समय में जहां शिक्षक किसी न किसी वजह से आलोचनाओं का केंद्र बने हुए हैं, सरकारी स्कूलों से लोगों का मोह भंग हो रहा है। ऐसी स्थिति में राजकीय प्राथमिक विद्यालय देवप्रयाग के प्रधानाध्यापक विजय रावत सरकारी स्कूलों के लिए उम्मीद जगाते हैं।
उनके आने के बाद जहां स्कूल के बाहरी वातावरण का कायाकल्प हो गया, वहीं उन्होंने अपनी सहयोगी शिक्षिका कमला पंत के साथ मिलकर स्कूल के शैक्षणिक वातावरण में आमूल-चूल परितर्वन कर डाले। जब विजय रावत ने वर्ष 2014 में कार्यभार ग्रहण किया था, तब स्कूल में मात्र 8 बच्चे थे, आज छात्र संख्या 30 पहुंच गई है। इस स्कूल के बच्चे अंग्रेजी स्कूलों के बच्चों को मात दे रहे हैं। गुरुजी की मेहनत और समर्पण देखकर लोगों ने निजी स्कूलों से अपने बच्चों को निकालकर यहां एडमिशन करवा दिया है।
प्रावि देवप्रयाग तहसील ऑफिस के समीप स्थित है। विद्यालय में घुसते ही ऐसा लगता है कि किसी प्राइवेट स्कूल या सरकारी मॉडल विद्यालय में आ गए हैं। एक ओर किचन गार्डन है जिसमें उत्पादित सब्जियां मिड डे मील में काम आती हैं। विद्यालय प्रांगण में बैडमिंटन कोर्ट है। झूले लगे हैं। एक ओर स्पोर्ट्स रूम है जहां बच्चों के लिए खेलने के लिए टेबिल टेनिस है। कंप्यूटर लैब और लाइब्रेरी अलग से है। लैब में 5 कंप्यूटर हैं, जिनमें बच्चे प्रेरक फिल्म या ड्राइंग सीखते हैं। लाइब्रेरी में सरकारी किताबों के अलावा अन्य किताबें है। लाइब्रेरी बच्चे खुद संचालित करते हैं। बच्चे नीचे बैठने के बजाय कुर्सियों में बैठते हैं। स्कूल में सामान्य चूने के बजाय महंगा पेंट लगा हुआ है। कमरों में पंखे लगे हैं। पानी का फिल्टर है।
आज से तीन साल पहले यह विद्यालय ऐसा नहीं था। विजय गुरुजी के आने बाद यह परिवर्तन आया। मार्च 2014 में जब गुरुजी का यहां तबादला हुआ था, तब बाउंड्रीवाल नहीं थी। गेट टूटा हुआ था। उन्होंने सर्वप्रथम बाउंड्रीवॉल में स्कूल में निष्प्रयोज्य रखी टिन की चादर लगाई और गेट ठीक कराया ताकि आवारा पशु अंदर न घुस सके। इसके बाद उन्होंने मैदान को ठीक कराया। किचन गार्डन बनवाया। दो कक्षा कक्ष बंद थे और उनमें कबाड़ भरा था। इनको साफ करवाकर एक को स्पोर्ट्स रूम और एक को कंप्यूटर लैब/लाइब्रेरी बनाई।
स्कूल में बिजली नहीं थी। सरकारी बजट से बिजली कनेक्शन लग गया। फिर बिजली की फिटिंग कराई गई। लोगों से दान स्वरूप उन्होंने पंखे देने का निवेदन किया। इसके चलते आज यहां प्रत्येक कक्ष में पंखे लगे हुए हैं। 2 कंप्यूटर उन्होंने कहीं से सेकेंड हैंड खरीदे, जबकि तीन कंप्यूटर दूसरी स्कूलों से मिल गए। यह कंप्यूटर खराब थे, जिनको उन्होंने सही करवाया। बच्चों को स्कूल के बैग किसी विदेशी मददगार से दिलवाए।
छात्र संख्या 8 से 30 पहुंची
श्रीनगर। प्रावि देवप्रयाग में वर्ष 2014 में 8 छात्र पंजीकृत थे। वर्ष 2015 में 18, वर्ष 2016 में 20 और वर्ष 2017 में 30 छात्र संख्या हो गई। अभी भी कई अभिभावक अपने पाल्यों का यहां एडमिशन करवाना चाहते हैं, लेकिन न्यूनतम उम्र की सीमा के कारण वह रुके हुए हैं। नगर क्षेत्र में होने की वजह से विजय रावत की स्कूल का सीधा मुकाबला प्राइवेट विद्यालयों से है, लेकिन विजय को उम्मीद है कि अगले 2-3 सालों में छात्र संख्या 100 तक पहुंच जाएगी।
पद भी छोड़े
श्रीनगर। बच्चों को पढ़ने का पर्याप्त समय मिले। इसके लिए विजय रावत और कमला पंत छुट्टी होने के बाद ही डाक या अन्य विभागीय कार्य करते हैं। विजय ने बच्चों के लिए संकुल समन्वयक और प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री के पदों का भी त्याग कर दिया।
कोट
पहले विद्यालय का वाह्य वातावरण सुधारा ताकि अभिभावक आकर्षित हों। फिर शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने का काम हुआ। विद्यालय को बेहतर बनाने के लिए अब तक डेढ़ लाख रुपये से ऊपर खर्च हो गए हैं। -विजय रावत, प्रधानाध्यापक, प्रावि देवप्रयाग
यह विद्यालय प्राइवेट विद्यालयों को मात दे रहा है। मैंने अपनी पुत्री अंग्रेजी के चक्कर में प्राइवेट स्कूल में रखी थी। प्रावि देवप्रयाग के माहौल को देखकर वहां से यहां ले आया। आज अंग्रेजी हो या अन्य कोई विषय, पहले की तुलना में सुधार हुआ है। -मुकेश कुमार, अध्यक्ष विद्यालय प्रबंधन समिति
मैं खुद विजय के स्कूल में गया था। उन्होंने बहुत ही सराहनीय प्रयास किए हैं। अपने संसाधनों के बलबूते उन्होंने प्रावि देवप्रयाग को अंग्रेजी स्कूलों से बेहतर बना दिया है। -एसपी खाली, अपर शिक्षा निदेशक गढ़वाल मंडल