बदरीनाथ। चंद्र ग्रहण के चलते सोमवार को बदरीनाथ धाम के कपाट एक बजकर 50 मिनट पर बंद कर दिए गए। चंद्र ग्रहण के बाद मंगलवार तड़के पांच बजे बाद बाद पुन: भगवान बदरीनाथ की नित्य पूजा का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण काल से नौ घंटे पूर्व सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान मंदिरों में कोई भी पूजा नहीं की जाती है। मान्यता के अनुसार सोमवार को बदरीनाथ धाम में साढे़ बारह बजे भगवान बदरी विशाल को बालभोग लगाया गया और एक बजे शयन आरती के बाद 1.50 बजे बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। धाम में बदरीनाथ मंदिर के साथ ही आदि केदारेश्वर, लक्ष्मी नारायण सहित अन्य सभी मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए हैं। वहीं चंद्र ग्रहण के चलते रुद्रनाथ, गोपीनाथ, बामनाथ, कार्तिक स्वामी, अनुसूया देवी सहित सभी मंदिरों के कपाट सूतक काल के लिए बंद कर दिए गए हैं। बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि ग्रहण काल के बाद मंगलवार को तड़के पांच बजे भगवान बदरीनाथ की अभिषेक पूजाएं शुरू कर तीर्थयात्रियों के लिए दर्शन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
416 श्रद्धालुओं ने किए केदार दर्शन
रुद्रप्रयाग। सोमवार को केदारनाथ में 416 श्रद्धालुओं ने 12 बजे तक भगवान का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया। इसके बाद चंद्रग्रहण के चलते मंदिर के गर्भ गृह के कपाट बंद कर दिए गए। शाम पांच बजे कुछ देर के लिए कपाट खोल दिए गए। परिसर से ही आरती कर पुन कपाट बंद कर दिए गए। मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने बताया कि मध्य रात्रि के बाद दो बजे धाम में शुद्धिकरण की प्रक्रिया के बाद पूजा अर्चना शुरू कर दी जाएगी। मंगलवार सुबह से बाबा केदार भक्तों को नियमित दर्शन देंगे। सोमवार को 252 पुरुष, 139 महिलाएं और 25 बच्चों समेत कुल 416 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। ब्यूरो