अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। श्री दक्षिण काली मंदिर में चल रहे श्री कैलाशेश्वर सदाशिव के महारुद्राभिषेक में शिव भक्तों के साथ ही शिव स्वरूप सन्यासी संत भी शिरकत कर रहे हैं। छह अगस्त को महारुद्राभिषेक की पूर्णाहुति होगी। शनिवार को वृंदावन धाम की मठ गोशाला के संस्थापक संचालक स्वामी नागाबाबा महाराज ने रुद्राभिषेक का दर्शन कर लोक कल्याण की कामना की और महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी से चर्चा भी की।
अनादि सिद्धपीठ श्री दक्षिण काली मंदिर को सिद्ध महापुरूषों की तपस्थली बताते हुए नागा बाबा ने कहा कि तप और साधना से संत को सिद्धि की प्राप्ति होती है। नागा बाबा ने कहा कि तपसाधना की कोई अवधि नहीं होती है न ही भगवान घडत्री देखकर प्रसन्न होते है।
शनिवार को भगवान आशुतोष का देवभूमि के अद्भुत पुष्पों से श्रृंगार किया गया जबकि नियमित चलने वाले अभिषेक में मक्खन, भांग, सब्जी, फल, पंचामृत सहित एक महीने तक प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ का श्रृंगार किया जाता है।
महारुद्राभिषेक के आचार्यद्वम पं. पवनदत्त मिश्रा एवं पं. प्रमोद पांडेय ने बताया कि चंद्रग्रहण पर सूतक लगने से 6 अगस्त को ही महारुद्राभिषेक की पूर्णाहुति कर ली जाएगी तथा सात अगस्त को पूर्वाह्न से दोपहर तक शोभायात्रा, गंगापूजन, भगवान का गंगा स्नान इत्यादि संपन्न करवाकर मंदिर के कपाट खुलने के बाद ही मौनव्रत संकल्प के साथ भगवान शिवा एवं माई का प्रसाद भक्तों को देकर सामूहिक रूप से विश्व कल्याण की कामना की जाएगी।