नवजात के लिए स्तनपान वरदान : डा. जयंती
विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत चलेगा जागरूकता अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला।
विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी के कम्युनिटी मेडीसिन विभाग को स्टेट कोर्डिनेटर बनाया गया है। कम्युनिटी मेडीसिन विभाग की संस्था इंडियन एसोसिएशन प्रिवेंटिव एंड सोशल मेडिसीन यूपी यूके ने एसआरएचयू कम्युनिटी मेडिसीन विभाग को जिम्मेदारी दी है।
एसआरएचयू कम्युनिटी विभागाध्यक्ष डा. जयंती सेमवाल ने बताया कि जौलीग्रांट, डोईवाला, ऋषिकेश, थानो में विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान वरदान है। मां का पहला गाढ़ा दूध बच्चे का पहला टीकाकरण होता है। इस दूध से बच्चे को आवश्यक खनिज और रोगों से लड़ने की शक्ति मिल जाती है। अभियान को कोर्डिनेट कर रही डा. रुचि जुयाल और डी दीपशिखा ने बताया कि अभियान का मकसद महिलाओं के साथ आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के साथ अन्य हेल्थ वर्करों को भी जागरूक करना है। साप्ताहिक जागरूकता अभियान में पोस्टर प्रदर्शनी, सेमीनार, स्लोगन और निबंध आदि से जागरूक किया जाएगा। अभियान में डा. पुनीत फरजाना, आराधना आदि सहयोग कर रहे हैं।
स्तनपान कराने का समय
जन्म के करीब आधे घंटे बाद माताएं अपने शिशु को स्तनपान करा सकती हैं। वहीं, सिजेरियन से हुए शिशु उनकी करीब चार घंटे बाद या एनिस्थिसिया के प्रभाव से बाहर आने के बाद स्तनपान करा सकती हैं।
स्तनपान कराने से लाभ
शिशु और मां में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है, शिशु स्वस्थ रहता है। शिशु का बौद्धिक विकास तेजी से होता है। शिशु में कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप का खतरा कम हो जाता है।
स्तनपान से जुड़ीं भ्रांतियां
पहला दूूध फेंकना, जन्म के चौबीस घंटे बाद दूध पिलाना, स्तनपान से पहले शिशु को शहद चटाना।