अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि नीतीश को यदि महागठबंधन तोड़ना ही था तो वे विधानसभा भंग कराकर दोबारा चुनाव कराते, लेकिन जिस तरह से भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई ये जनता के साथ बड़ा धोखा है। उन्होंने भाजपा को घेरते हुए कहा कि भाजपा ने देश को कांग्रेस मुक्त के साथ ही विपक्ष मुक्त कराने का भी निर्णय ले लिया है, लेकिन इसके लिए विपक्ष एकजुट होकर जनता के बीच जाएगा।
रविवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि भाजपा की सरकारें धनबल से गुजरात के साथ अन्य प्रदेशों में चुने हुए जन प्रतिनिधियों से इस्तीफा दिलवाकर लोकतंत्र की हत्या करा रही हैं। राज्यों की सरकारों को बदलवा रहे हैं। केंद्र सरकार लोकतंत्र के निम्न स्तर पर काम कर रही है जो लोकतंत्र के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को एकमत होकर भाजपा की इस कुचेष्ठा के खिलाफ उतरना होगा। उन्होंने बिहार के प्रकरण पर भाजपा को घेरते हुए कहा कि 2015 के चुनाव में वहां की जनता ने महागठबंधन को स्वीकार करते हुए भाजपा को बेदखल कर दिया था। उन्होंने सवाल किया कि क्या तब नीतीश को लालू यादव के कार्यों की जानकारी नहीं थी लेकिन नीतीश ने नैतिक मूल्यों की हत्या की और यह अवसरवाद है। उन्होंने किसानों के द्वारा की जा रही आत्महत्या के मामलों पर केंद्र और राज्य सरकारों को घेरते हुए कहा कि जब चुनाव हो रहे थे तो स्वयं प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और अमित शाह ने किसानों के ऋण माफ करने के साथ आमदनी को दोगुना करने की घोषणाएं की थी, लेकिन हुआ क्या, केंद्रीय वित्त मंत्री ने किसानों की ऋण माफी को प्रदेश के पाले में डाल दिया। उन्होंने शिक्षा विभाग में भर्ती का प्रकरण उठाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने 20 हजार पदों को फ्रिज कर दिया है। उन्होंने चेेतावनी दी कि वह प्रदेश में किसानों और बेरोजगारों के हितों के लिए सड़क पर उतरेंगे। इस मौके पर पूर्व ओएसडी पुरुषोत्तम शर्मा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राव आफाक अली, संतोष चौहान, मकबूल कुरैशी, धर्मेंद्र प्रधान, मनीष कर्णवाल, राजीव चौधरी, राहुल चौहान आदि मौजूद थे।