अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
योग का डंका पूरे विश्व में बज चुका है। स्वामी रामदेव और प्रधानमंत्री के प्रयासों से योग को अंतरराष्ट्रीय दिवस का दर्जा भी मिल गया है। अब आयुर्वेद के बारे में भी पश्चिमी देशों की जिज्ञासा बढ़ती जा रही है। पश्चिमी देशों से पतंजलि योगपीठ आकर प्रतिनिधि मंडल इस बारे में जानकारी प्राप्त करने के साथ ही कुछ विषयों पर प्रशिक्षण भी ले रहे हैं।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि आयुर्वेद की महत्ता को भारत के साथ-साथ एशिया के अनेक देश समझ चुके हैं। अरब देशों, रूस और चीन में योग के प्रति गहरी जानकारी पहले से ही मौजूद है। अधिकांश जानकारी पतंजलि योगपीठ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है। अब पाकिस्तान, बंगलादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया जैसे देशों में आयुर्वेदिक चिकित्सक मरीजाें का उपचार कर रहे हैं। आचार्य ने बताया कि अमेरिका तथा ब्रिटेन में आयुर्वेद की जानकारी पहले से उपलब्ध होने के बावजूद नए सिरे से अनुसंधान कार्य चल रहे हैं। पतंजलि योगपीठ के प्रयासों का इन दिनों देशों पर खासा असर पड़ा है। अब तमाम यूरोपीय देशों से डेलीगेशन पतंजलि योगपीठ आकर आयुर्वेद की महत्ता के बारे में किए जा रहे अनुसंधान कार्य का अवलोकन कर रहे हैं। शोध निष्कर्षों से पश्चिमी देश बहुत प्रभावित हैं।
आचार्य बालकृष्ण के अनुसार पतंजलि योगपीठ का वृहद अनुसंधान केंद्र देश- विदेश से आए करीब 200 वैज्ञानिकों के माध्यम से जड़ी बूटियों को औषधीय गुणों तथा महत्ता का पता लगाने की कोशिशों में जुटे हैं। पश्चिम जगत के लिए यह अनुसंधान केंद्र तथा इसके निष्कर्ष अनोखे हैं। पतंजलि योगपीठ में इन दिनों विश्व के पांच लाख से अधिक पौधों और जड़ी बूटियों पर अनुसंधान किया जा रहा हैं। विश्व में जहां कहीं जड़ी बूटियां उपलब्ध हैं, उनकी औषधीय गुणों की जानकारी वहां के चिकित्सकों को नहीं है। उन सभी पौधों को पतंजलि लाकर उन पर गहन अनुसंधान चल रहा है। जिसमें पश्चिमी वैज्ञानिक खासी रुचि दिखा रहे हैं। आचार्य ने बताया कि आयुर्वेदिक दवाओं के चमत्कारी प्रभाव को समझकर पतंजलि की आयुर्वेदिक औषधियों का बाजार भी पश्चिमी देशों में खुलता जा रहा हैं। वह दिन दूर नहीं जब योग की भाति भारत के आयुर्वेद का डंका भी पूरी दुनिया में बज उठेगा।