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तीज से शुरू हुई पारपंरिक पर्वों की लंबी श्रंखला

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
देश के पारपंरिक पर्व सिंधारा और तीज से प्रारंभ हो गए हैं। अब लंबे समय तक भारतीय संस्कृति से जुड़े पर्व लगातार आते रहेंगे। श्रावण शुक्ल पक्ष इन पर्वों की शुरुआत करता है, जबकि कार्तिक शुक्ल एकादशी पर ये पर्व संपूर्ण होते हैं। तब विष्णु जागरण के बाद मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो जाता है।
लोक गीतों और पुरातन परंपरा का निर्वहन करते हुए पर्वों की श्रृंखला शुरू होती हैं। इन चार महीनों में अनेक लोक पर्व आते हैं, तो समूचे भारत में मनाए जाने वाले दशहरा, दीपावली पर्व भी। तीज के बाद श्रावण शुक्ल पक्ष में ही लोक परंपरा के पर्वों की भरमार हो जाती है। इसी पक्ष में नाग पंचमी, कल्कि जयंती, तुलसी जयंती, अचला सप्तमी, श्रावणी उपकर्म, रक्षा बंधन आदि पर्वों का आगमन हो जाएगा। गुघाल जैसे लोक परंपरा के लोक मेले भी अब भरेंगे। इसी प्रकार दरियाओं की जोत यात्राएं शुरू हो जाएगी। इन पर्वों को भारतीय संस्कृति में उच्च स्थान प्रदान किया गया है। श्राद्ध पक्ष ऐसा पक्ष है, जो उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक हर गांव शहर में मनाया जाता है। श्राद्ध पक्ष भी इस देश में पर्व की तरह ही मनता है। इसी प्रकार शारदीय नवरात्र पूरे देश में मनाए जाते हैं। बीच- बीच में लोक परंपरा के पर्व आते रहते हैं। कार्तिक मास में दीपावली से ठीक 11 दिन बाद देवोत्थान होते ही इन पर्वों की अवधि समाप्त होती है। यह अवधि फिर कुछ पर्वों के माध्यम से मकर सक्रांति से शुरू होती है, किंतु पर्वों की भरमार तो तीज का पावन पर्व ही लेकर आता है।
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श्रावण मास की भांति भाद्रपद मास भी इस नगरी में शिव के नाम पर गंगा जल यात्रा के रूप में मनाया जाता है। विशेष रूप से बिहार और पूर्वोत्तर भारत के हजारों श्रद्धालु गंगा जल को यात्रा कराने गंगा तट पहुंचते हैं। कृष्ण जन्मोत्सव, चंदन षष्टी, सूर्य कष्टी, गोगानवमी, राधा अष्टमी, पदमा एकादशी जैसे पर्वों से भारतीय संस्कृति परवान चढ़ी है। तीज से प्रारंभ हुए पर्व भारत की सांस्कृतिक विरासत में शामिल हैं।
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