अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कांवड़ मेला आस्था और जुनून के साथ ही कला के प्रदर्शन का भी मेला है। कांवड़ बनाने और सजाने में कारीगर अपनी रचनाधर्मिता से ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। कला और विजन के आधार पर बन रही बड़ी-बड़ी कांवड़ यहां पचास-पचास हजार तक में भी बिक रही हैं।
आस्था का पर्व कांवड़ मेला इस समय अपने चरम पर है। भगवान शिव को समर्पित मेले में देश के हर हिस्से से कारीगर कांवड़ में साज सज्जा कर अपना हुनर दिखा रहे हैं। समूह बनाकर आने वाले कांवड़िए हजारों रुपये की कांवड़ खरीद रहे हैं। इन कारीगरों की कला के माध्यम से हरिद्वार में कहीं भगवान शिव के बारह ज्योर्तिलिंग के दर्शन हो रहे हैं तो कहीं सोमनाथ मंदिर, रामेश्वरम तो कहीं केदारनाथ, महाकालेश्वर और नीलकंठ महादेव की आकृति सरीखी कांवड़ तैयार की जा रही हैं।
मेरठ से कांवड़ का कारोबार करने आए मोहम्मद जीशान ने बताया कि उनके यहां विभिन्न मंदिरों की कलाकृतियों की कांवड़ बनाने के साथ ही सामान्य कांवड़ को शिवभक्तों की इच्छा के अनुरूप सजाने का भी काम किया जा रहा है। रंगीन कपड़े, लाइटें और फूल आदि से सजी कांवड़ लोगों को खूब आकर्षित कर रही है। ज्वालापुर के संजीव कुमार ने बताया कि उनके यहां की कई कांवड़ लोगों को खासी आकर्षित कर रही हैं। बीते वर्षों की अपेक्षा सजावटी कांवड़ एक तिहाई कांविड़यों की पंसद बन चुकी है। सजावटी कांवड़ पांच हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक बिक रही है।