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बदस्तूर जारी है गंगा किनारे निर्माण

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
एनजीटी ने गंगा के किनारे सौ मीटर दूर तक किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित करने के आदेश दिए हैं। बावजूद इसके यहां गंगा के किनारे निर्माणों की बाढ़ आई हुई है। कुंभ और अर्द्धकुंभ के दौरान तो निर्माणों की संख्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। पहले अस्थायी रूप से बनने वाले यह निर्माण बाद में राजनीतिक संरक्षण में स्थायी हो जाते हैं। ऐसे सैकड़ों निर्माण अब भी मौजूद है।
हरिद्वार में गंगा की दो धाराएं बहती है। एक धारा हरकी पैड़ी होते हुए मायापुर पहुंचती है। जबकि दूसरी धारा हरकी पैड़ी के सामने चंडीद्वीप से होकर गुजरती है। हरकी पैडी का ज्यादा आध्यात्मिक महत्व होने से इस क्षेत्र में पहले से ही होटल, धर्मशाला और आवासीय भवन बनते रहे हैं। हालांकि हरिद्वार में पहले से ही गंगा के किनारे दो सौ मीटर तक निर्माण नहीं होने देने का नियम लागू है। बावजूद इसके हरिद्वार रुडकी विकास प्राधिकरण की अनदेखी से यहां गंगा किनारे लगातार भवन निर्माण हो रहे है। हाल ही में निरंजनी अखाड़े के बगल में बना बहुमंजिला भवन ताजा बानगी है।
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दूसरी तरफ नीलधारा में दर्जन भर से ज्यादा अस्थायी अवैध बस्तियां बसी हुई है। कई आश्रमों के संचालकों ने यहां पक्के निर्माण करके गंगा की नीलधारा को ही संकरा कर दिया है। इनमें ऐसे नामी लोग भी शामिल है जिनके कंधों पर गंगा को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी है। कहीं कुष्ठ आश्रम तो कही गोशाला के नाम पर गंगा की नीलधारा का पार्ट संकरा कर दिया गया। कुंभ और अर्द्धकुंभ के समय इस तरह के निर्माणों की तादाद बढ जाती है।

कांग्रेस सरकार ने बदल दी थी गंगा की परिभाषा
हरिद्वार। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने पिछले साल हरकी पैड़ी क्षेत्र में गंगा के दो सौ मीटर के दायरे में आ रहे निर्माणों को बचाने के लिए गंगा की धारा की परिभाषा ही बदल दी थी। सरकार ने इसे गंगनहर का चैनल बता दिया था। इस निर्णय का भारी विरोध भी हुआ था। गंगासभा समेत कई संगठन इस निर्णय के विरोध में उतर आए थे।
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प्रदेश सरकार के प्रवक्ता शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि भाजपा सरकार एनजीटी के आदेशों का पालन कराने के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की ओर से हरकी पैड़ी पर आने वाली गंगा की धारा को गंगा नहीं माने का आदेश गलत है। राज्य सरकार इसे बदलेगी।
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