एक बार युद्ध में शत्रुओं को हराने के बाद वह वापस लौट रही थीं। कांडा गांव के पास हार से अपमानित रामू रजवार नाम के कन्त्यूरी सैनिक ने उन पर तलवार से हमला कर दिया था।
जिसके बाद 22 वर्ष की आयु में वह वीरगति को प्राप्त हुईं। उनकी याद में आज भी कांडा ग्राम व बीरोंखाल क्षेत्र के लोग कौथिग मेला आयोजित करते हैं।
हर साल ढोल-दमाऊ तथा निशाण के साथ तीलू रौतेली की प्रतिमा का पूजन किया जाता है।