आंचल डेयरी से जुड़ी 270 समितियों के करीब 15 हजार दूध उत्पादकों के लिए अच्छी खबर है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की सहमति के बाद आंचल डेयरी का आधुनिकीकरण करके इसे मॉडल डेयरी बनाया जाएगा।
इससे दुग्ध उत्पादकों के धंधे पर छाया संकट टल जाएगा। यही नहीं उपभोक्ताओं को भी बेहतर उत्पाद मिल सकेगा, क्योंकि आधुनिकीकरण के बाद डेयरी के उत्पाद आठ से दस दिन तक खराब नहीं होंगे।
आंचल डेयरी से दून जिले के 270 गांवों की इतनी ही समितियों के लगभग 15 हजार लोग जुड़े हैं। दूध बेचकर यह लोग जीविका चलाते हैं। लेकिन करोड़ों का घाटा झेल रही डेयरी बंदी के कगार पर है।
इस वजह से दुग्ध उत्पादकों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया है। आंचल के आधुनिकीकरण से इन लोगों को राहत मिलेगी। यही नहीं डेयरी के उत्पादों का उपयोग करने वालों को भी बेहतर उत्पाद मिल सकेगा।
अभी स्थिति यह है कि आंचल डेयरी के उत्पाद दो से तीन दिन भी ठीक से नहीं टिक पाते हैं। दशकों पुराने संयंत्रों और शुरूआत से ही प्रबंधन की हीलाहवाली के चलते यह स्थिति बनी थी।
रेट बढ़ाने की होती रही है मांग
डेरी से जुड़ी समितियां रेट बढ़ाए जाने की मांग करती रही है, जिसे देखते हुए प्रशासक समिति की ओर से प्रति लीटर एक रुपये बढ़ाने का प्रस्ताव प्रबंध निदेशक को भेजा गया है। वर्तमान में साढ़े छह से नौ फेट तक 23.50 रुपये से लेकर 29 रुपये प्रतिलीटर दूध के दाम दिए जा रहे हैं।
मांग के अनुरूप नहीं मिल पा रहा दूध
समितियों से मांग के अनुरूप दूध न मिल पाने से लगभग पांच हजार लीटर दूध की ऊधम सिंह नगर से आपूर्ति हो रही है। दूध उत्पादन के प्रति किसानों में घटता रुझान भी बड़ी चुनौती है।
क्या है दिक्कतः
डेरी में प्रतिदिन पंद्रह हजार लीटर दूध एकत्र कर दूध पैकेट, दही, मक्खन, पनीर और चीज तैयार किया जा रहा है, लेकिन प्रतिस्पर्धा के दौर के बावजूद इसके उत्पाद अधिक दिनों तक न टिक पाने से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यह होगा लाभः
-उपभोक्ताओं को उत्तम गुणवत्ता का दूध और उत्पाद मिलेंगे
-नवीनतम तकनीक के संयंत्रों की स्थापना से प्रसंस्करण लागत को कम किया जा सकेगा
-दुग्ध उत्पादकों को बेहतर दुग्ध मूल्य का भुगतान हो सकेगा।
-प्रतिस्पर्धा के दौर मेंप्राईवेट कंपनियों के समान दूध एवं दूध उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
इनकी भी सुनिए
पुरानी डेरी को खत्म कर आंचल को प्रदेश की मॉडल डेरी के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए डेरी में अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी, प्रतिस्पर्धा के दौर में बाजार में टीके रहने के लिए ऐसा करना बहुत जरूरी था।
-किशन सिंह नेगी, सहकारी दुग्ध संघ के अध्यक्ष
आधुनिक डेरी में लगेंगी यह मशीनें-
संयंत्र नाम लागत (लाख में) 1-रॉ मिल्क रिशेप्सन सेक्शन संयंत्र 35.25 2-मिल्क प्रोसेसिंग सेक्शन संयंत्र 35.25 3-तरल दूध पैकिंग सेक्शन संयंत्र 33.6 4-घी एवं बटर निर्माण पैकिंग संयंत्र 21.3 5-पनीर मेकिंग पैकिंग संयंत्र 10 6-दही मेकिंग पैकिंग संयंत्र 15 7-छाछ मेकिंग पैकिंग संयंत्र 12 8-सर्विस ब्लॉक, हार्ड पार्क एवं सड़क निर्माण 314.57 9-अन्य आवश्यक सेवा से संबंधित संयंत्र 101.8