अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
सावन मास के दूसरे ही दिन हरियाणा और दिल्ली के साथ-साथ पंजाब के कांवड़ियों के भी पहुंचने से हरिद्वार के कारोबारी चकित है। ऐसा पहले कभी भी नहीं हुआ है कि चतुर्थी से पहले हरियाणा और पंजाब से भी कांवड़िए आए हों। राजस्थान और मध्य प्रदेश से आए अधिकांश कांवड़िए जल भरकर लौट गए हैं।
मंगलवार को पूर्वी उत्तर प्रदेश से भी हजारों कांवड़िए पहुंचे। यूपी से कुछ डाक वाहन भी नजर आने लगे हैं। सावन के दूसरे दिन आमतौर पर यूपी के कांवड़िए ही धर्मनगरी आते थे। चतुर्थी से पंजाब और हरियाणा की बारी आती थी। दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कांवड़िए तो आखिरी पांच दिनों में जल भरने पहुंचते थे। इस बार उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर, हरदोई तथा प्रतापगढ़ से भी कांवड़िए आ रहे हैं। आमतौर पर ये कांवड़िए प्रयाग के रास्ते काशी से जल भरकर वैधनाथ धाम जाते हैं। पंजाब के लुधियाना, रोपड़, जालंधर, चंडीगढ़ तथा हरियाणा के अंबाला से हजारों की संख्या से कांवड़िए पहुंच रहे हैं।
हरकी पैड़ी पर भी लगने लगा कांवड़ बाजार
हरिद्वार। पंतद्वीप का कांवड़ बाजार अभी पूरी तरह से नहीं सजा है। इसके विपरीत हरकी पैड़ी तक पर कांवड़ का सामान बिक रहा है। हरकी पैड़ी पुलिस चौकी के ठीक बाहर ही कांवड़ की दुकान खुल गई है। हरकी पैड़ी से सटे सुभाषघाट पर कांवड़ का सामान जमकर बिक रहा है। बड़ा बाजार में आमतौर पर कांवड़ सामग्री नहीं बिका करती थी। यह बाजार बेहद संकरा है और यहां नियमित यात्रियों ही जमकर खरीदारी करते थे। इस बार तो बड़ा बाजार के साथ-साथ मोती बाजार में कांवड़ का बाजार सजा है। हरकी पैड़ी पर नाईसोता के रास्ते बाजार जाने वाले मार्ग पर कांवड़ बाजार की खूब रौनक है। यही हाल भीमगोड़ा से सटे हरकी पैड़ी जाने वाले मार्ग का है। गंगा के पार रोडी मैदान में कांवड़ सामान के साथ-साथ कांवड़ियों के लिए ढाबे भी खूब खुल गए हैं।