गोपेश्वर (ब्यूरो)। चमोली जिले के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में अपनी सेवाएं दे रहे दो अन्य चिकित्सकों को भी आयुर्वेदिक कॉलेज देहरादून से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि चार डॉक्टरों को बीते अप्रैल माह में देहरादून और हरिद्वार के चिकित्सा संस्थानों से संबद्ध किया गया है, जिससे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं।
जिले के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में चिकित्सकों के 63 पद सृजित हैं। इसमें से 27 पद रिक्त चल रहे हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल घेष में डॉक्टर तो दूर फार्मेसिस्ट की तैनाती भी नहीं है, जिससे वार्ड ब्वाय के भरोसे अस्पताल संचालित हो रहा है। बीते अप्रैल माह में आयुर्वेदिक एवं यूनानी निदेशालय देहरादून की ओर से जिले के विभिन्न अस्पतालों में तैनाती डॉक्टर डा. शोभा रानी मिश्रा, डा. ज्योति राणा, डा. आभा सिंह और डा. सिद्धि मिश्रा को आयुर्वेद विश्वविद्यालय देहरादून और ऋषिकुल हरिद्वार में संबद्ध कर दिया गया था। अब बीती तीन जुलाई को राजकीय आयुर्वेदिक हंसकोटी में तैनात डा. विश्वजीत मांझी, आयुष विंग गोपेश्वर में तैनात डा. अनीता चौहान और आयुर्वेदिक चिकित्सालय नारायणबगड़ में तैनात डा. प्रीति वर्मा को भी आयुर्वेदिक संस्थान हर्रावाला देहरादून में संबद्ध कर दिया गया है।
पीजी कॉलेज गोपेश्वर के पूर्व छात्र संघ महासचिव संदीप झिंक्वाण, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष अरविंद नेगी और मनमोहन चतुरा का कहना है कि आयुर्वेदिक चिकित्सालय ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद हैं। ग्रामीणों का स्वास्थ्य इन्हीं स्वास्थ्य केंद्रों के भरोसे है, लेकिन यहां डॉक्टर की कमी से ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इनसेट
देहरादून में स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज की मान्यता बचाने के लिए पहाड़ से डॉक्टरों को देहरादून संबद्ध किया जा रहा है। यह तात्कालिक व्यवस्था है। जैसे ही नए चिकित्सक मिल जाएंगे, तो संबद्ध किए चिकित्सकों को मूल तैनाती स्थल पर भेज दिया जाएगा।
-एके त्रिपाठी, निदेशक, आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग, देहरादून