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माइग्रेन से पीड़ित रघुवीर ने योग अपनाया, तो बन गए योगाचार्य

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योग अपनाया तो माइग्रेन से मिला छुुटकारा
दस सालों से कक्षाएं लगाकर लोगों कर रहे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक
22 गांवों में योग के प्रति चलाया जन-जागरूकता अभियान

प्रमोद सेमवाल
गोपेश्वर।


पांच साल से माइग्रेन से पीड़ित चमोली के जखमाला गांव के रघुवीर सिंह बर्त्वाल योग अपनाकर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं साथ ही अन्य लोगों को भी योग सिखाकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं। वे वर्ष 2006 से लोगों को योग के प्रति जागरूक करने में लगे हैं।
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आदर्श विद्या मंदिर कोठियालसैंण के आचार्य रघुवीर सिंह बर्त्वाल पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी हैं। रघुवीर बताते हैं कि वे पांच साल से माइग्रेन से पीड़ित थे। दवाई खाने के बाद भी राहत नहीं मिल रही थी। टीवी पर जब योग के बारे में देखा तो योगासन करना शुरू कर दिया। माइग्रेन की बीमारी से एक माह में ही आराम मिलने लगा और धीरे-धीरे माइग्रेेेन से छुुटकारा मिल गया। रघुवीर बताते हैं कि साल 2006 के मई माह में गोपेश्वर में पतंजलि योग समिति की ओर से योग शिविर लगा। यहां देहरादून में दस दिवसीय विशेष योग शिविर के लिए चयन हो गया। देहरादून में प्राणायाम, आसन सीखे। यहीं से योग के प्रति मन में एक जिज्ञासा जागृत हुई। वर्ष 2007 में कोठियालसैंण में विद्यालय के समीप ही एक घंटे की योग सिखाने की कक्षाएं शुरू कर दीं। शुरुआत में पांच से आठ लोग ही योग आते थे लेकिन अब करीब सौ लोग योग सीखने आ रहे हैं। वर्ष 2009 में रघुवीर सिंह बर्त्वाल ने 22 गांवों का भ्रमण कर गांव-गांव में योग के प्रति जन-जागरुकता अभियान भी चलाया। उनकी पत्नी बबीता (गृहणी) और दो बच्चे भी नियमित योग करते हैं। रघुवीर कहते हैं कि योग को दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए, तो शरीर की सभी विकृतियां दूर हो जाती हैं। योग से निरोग की ओर बढ़ें।
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