श्रीनगर मेडिकल कालेज में कमियां ही कमियां
निरीक्षण के बाद एमसीआई ने भेजा कमियों का पुलिंदा
>> कमियां नहीं की दूर तो पीजी की एनओपी में रोड़ा
संदीप थपलियाल
श्रीनगर। विगत मई माह में प्री-पीजी एसेसमेंट के लिए आई एमसीआई (भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद) की टीम ने राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में कमियां ही कमियां गिनाई हैं। एमसीआई ने कॉलेज में मुख्यतया 23 बिंदुओं की ओर ध्यान खींचा है। एमसीआई ने संस्थान को एक माह के अंदर कमियां पूरी कर जवाब भेजने के निर्देश दिए हैं।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज ने 14 विभागों में पीजी (एमडी/एमएस) के लिए आवेदन किया है। इसी क्रम में विगत 16-17 मई को एमसीआई की तीन सदस्यीय टीम ने मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था। निरीक्षण के पश्चात टीम ने प्री-पीजी एसेसमेंट रिपोर्ट तैयार की, जिसको 23 मई को एमसीआई कार्यकारी समिति में रखा गया। टीम ने कॉलेज में काफी कमियां पाई। जो पीजी की एनओपी (अनुमति पत्र) में रोड़ा हैं। समिति ने इसी आधार पर संस्थान को पत्र भेजते हुए एक माह में उक्त कमियों को दूर करने के लिए कहा है। अमर उजाला ने 21 मई के अंक में पीजी कोर्स की राह नहीं आसान शीर्षक से खबर प्रकाशित कर पहले ही इन कमियों की ओर इशारा कर दिया था।
..................
यह हैं प्रमुख कमियां
>> फैकल्टी में 25.47 फीसदी कमी (एमसीआई 10 फीसदी नीचे फैकल्टी की कमी को स्वीकारता है)।
>> रेजीेडेंट चिकित्सकों की कमी 31.34 फीसदी।
>> अस्पताल की ओपीडी में 491 मरीज पंजीकृत। जबकि कम से कम 800 मरीज प्रतिदिन रजिस्टर्ड होने चाहिए।
>> अस्पताल की बेड ऑक्यूपेंसी 51 फीसदी। (जबकि 70 फीसदी होने चाहिए)।
>> रेडियोलॉजिस्ट का अभाव।
>> बिना रेडियोलॉजिस्ट की रिपोर्टिंग के सीटी स्केन किए जा रहे हैं।
>> ओपीडी रुम मानकों के अनुसार नहीं।
>> सीटी स्कैन भी मानक के अनुसार नहीं।
>> सेंट्रल स्ट्रलाइजेशन सर्विस डिपार्टमेंट मानक के अनुसार काम नहीं कर रहा है।
>> सेंट्रल रिसर्च लेबोरटरी का अभाव।
>> इंटेसिव कार्डिएक केअर यूनिट का अभाव।
......................
सीनियर रेजीडेंट की नियुक्ति के लिए इंटरव्यू हो रहे हैं। फैकल्टी की नियुक्ति के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। कमियों को दूर किया जा रहा है। प्रो. सीएमएस रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर