गृह जनपद पहुंचकर हेमंत ने किए अनुभव साझा
आईएएस परीक्षा में किया 88वें स्थान प्राप्त
अमर उजाला ब्यूरो
गोपेश्वर। आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद हेंमत सती पहली बार अपने गृह जनपद में नारायणबगड़ पहुंचे। शनिवार को गोपेश्वर में अमर उजाला के साथ हुई खास बातचीत में हेमंत सती ने अपने अनुभव साझा किए।
हेमंत का कहना है कि एक जिलाधिकारी यदि अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करे, तो वह अपने जिले से हो रहे पलायन को रिवर्स पलायन में तब्दील कर सकता है। गांवों से हो रहे पलायन की मुख्य वजह सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा की कमी है। गांवों में ये सुविधाएं मुहैया कराई जा सकती हैं। इसके लिए जिले के डीएम को व्यवस्थाओं में सुधार लाने की आवश्यकता है। कतिपय गांवों में प्राइमरी हेल्थ सिस्टम तक नहीं है। विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं। जिन गांवों में अस्पताल और विद्यालय हैं, वहां डीएम को औचक निरीक्षण करना चाहिए। यदि गांवों में सभी मूलभूत सुविधाएं मिल जाए, तो लोग पलायन करेंगे ही नहीं।
दस गरीब छात्रों को दिलाऊंगा फ्री कोचिंग
मेरे मन में गरीब और पढ़ाई में अव्वल छात्र-छात्राओं के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना है। भविष्य में जब भी किसी जिले में जिलाधिकारी बनकर जाऊंगा, वहां एक प्रतियोगी परीक्षा आयोजित कराई जाएगी। इसमें उत्तीर्ण टॉप टेन छात्रों को आईएएस की निशुल्क कोचिंग के लिए भेजा जाएगा।
लक्ष्य ने मुझे कभी चैन से बैठने नहीं दिया
वर्ष 2012 से प्रतिवर्ष आईएएस की परीक्षा दी। लेकिन सफल नहीं हो पाया। बीते साल 2015 में आईएएस का परीक्षा परिणाम आया तो सफल न होने पर मायूस होकर दिल्ली से घर लौटने का मन बना लिया। बीएड भी किया था। दृढ़ संकल्प लिया कि लक्ष्य हासिल करने के बाद ही चैन की सांस लूंगा।
युवाओं को संदेश- प्रत्येक उत्तराखंडी नेचर से मेहनती है। सिर्फ अपने अंदर के हुनर को पहचाने और भविष्य का लक्ष्य निर्धारित करें। डिग्री हासिल करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं पर जोर दें। अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में खर्च करें, सफलता जरूर मिलती है।
हेमंत सती का प्रोफाइल---
नाम-हेमंत सती
पिता का नाम- कांता प्रसाद सती (शिक्षक)
माता का नाम- श्रीमती सतेश्वरी देवी (गृहणी)
जन्म तिथि-18/11/1990
गांव-कोठली, नारायणबगड़, चमोली
शैक्षणिक योग्यता- प्रारंभिक शिक्षा शिशु मंदिर चौखुटिया, इंटर तक की शिक्षा जीआईसी चौखुटिया से हासिल की। बीएससी, एमए (इतिहास), बीएड