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मानहानि के केस में महिला फार्मासिस्ट दोषमुक्त

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मानहानि के केस में महिला फार्मेसिस्ट दोषमुक्त
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अमर उजाला ब्यूरो
कोटद्वार। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भवदीप रावते की अदालत ने एक डाक्टर द्वारा दायर मानहानि के परिवाद में आरोपी महिला फार्मेसिस्ट को दोषमुक्त करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने समस्त तथ्यों और खबर के प्रकाशन के परिस्थितियों पर विचार करने के बाद पाया कि आरोपी के खिलाफ इसमें मानहानि का कोई मामला साबित नहीं होता।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता नरेंद्र गुसाईं ने बताया कि मई, 2014 में रिखणीखाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्सा अधिकारी डा. एके बड़थ्वाल ने इसी अस्पताल में उनके अधीनस्थ कार्यरत महिला फार्मेसिस्ट पुनीता नेगी के खिलाफ आईपीसी की धारा 500 (मानहानि) में परिवाद दायर किया। डा. बड़थ्वाल का आरोप था कि फार्मेसिस्ट पुनीता नेगी ने एक प्रतिष्ठित अखबार (अमर उजाला नहीं) में उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एक समाचार प्रकाशित करवाया। इससे उनकी समाज में प्रतिष्ठा गिरी। विभागीय अधिकारियों ने इस मामले में जांच बिठाई तो उसमें वह निर्दोष पाए गए। परिवादी की ओर से बतौर क्षतिपूर्ति 70 लाख रुपये दिलाने की मांग की गई।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने विपक्षी पुनीता देवी को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत न्यायालय में तलब किया और उसे परिवादी के मामले में अवगत कराया गया। उनके बयान दर्ज किए गए। आरोपी ने अपराध से इनकार करते हुए विचारण की याचना की। बचाव पक्ष के अधिवक्ता नरेंद्र गुसाईं ने परिवाद पत्र के तथ्यों और उनकी परिस्थितियों के आधार पर मामले का खंडन करते हुए कहा कि परिवादी ने एकपक्षीय वास्तविकता न्यायालय के सामने रखी है, जबकि घटना के कई दूसरे पहलू और उससे जुड़े अन्य तथ्य हैं। बचाव पक्ष ने कोर्ट के सामने सुप्रीम कोर्ट और उत्तराखंड हाईकोर्ट की पांच नजीरें रखीं। पत्रावलियों पर उपलक्ष्य साक्ष्य और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने महिला फार्मेसिस्ट को मानहानि के आरोप से दोषमुक्त करने योग्य पाया।
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